-मदर्स डे पर नैत्राणा संवाद कार्यक्रम द्वारा विशेष आयोजन, समाज में बदलाव लाने वाली महिलाओं का हुआ सम्मान
-मुख्यमंत्री से लेकर समाजसेवी, चिकित्सक और कला जगत की हस्तियों ने साझा किया नारी शक्ति का संदेश
– ‘मां की शक्ति ही समाज की असली ऊर्जा’ – प्रेरक संवाद और सम्मान समारोह ने छोड़ी गहरी छाप
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। मातृत्व दिवस के अवसर पर नैत्राणा संवाद कार्यक्रम द्वारा ‘नारी शक्ति – एक रूप मां की शक्ति’ विषय पर शनिवार को एक विशेष एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में मातृत्व, संस्कार, सेवा और नेतृत्व के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली महिलाओं को सम्मानित करना तथा नारी शक्ति के वास्तविक स्वरूप को समाज के सामने प्रस्तुत करना रहा। कार्यक्रम भावनात्मक, सांस्कृतिक और प्रेरणादायक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ, जहां उपस्थित अतिथियों ने नारी शक्ति के विविध आयामों पर अपने विचार साझा किए। इस विशेष आयोजन में समाज, राजनीति, चिकित्सा, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, विशेष ओलंपिक भारत की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा, यशोदा चिकित्सालय समूह की प्रबंध निदेशक डॉ. उपासना अरोड़ा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की धर्मपत्नी मृदुला प्रधान, मंजू सिंह, अंजू आहूजा तथा पद्म भूषण एवं पद्म श्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना राधा रेड्डी सहित अनेक प्रेरणादायक महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सम्मान समारोह के दौरान इन सभी महिलाओं को वैष्णो माता के मुख्य पुजारी लोकेश पुजारी, जिन्हें पिंटू जी के नाम से भी जाना जाता है, द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करते समय उपस्थित महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मातृत्व केवल एक भाव नहीं बल्कि समाज निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है। कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुख रूप से सामने आया कि मां का स्वरूप केवल परिवार तक सीमित नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज की नारी पारंपरिक भूमिकाओं के साथ-साथ नेतृत्व, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। नारी अब केवल परिवार की आधारशिला नहीं बल्कि समाज की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति बन चुकी है। समारोह में मौजूद अतिथियों ने महिलाओं की उपलब्धियों को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।
इस अवसर पर डॉ. उपासना अरोड़ा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि एक महिला की वास्तविक शक्ति उसकी संवेदनशीलता, धैर्य और नेतृत्व क्षमता में निहित होती है। उन्होंने कहा कि महिला अपने परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाकर सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। उन्होंने इस सम्मान को समाज की उन सभी महिलाओं को समर्पित बताया जो निस्वार्थ भाव से सेवा और समर्पण का कार्य कर रही हैं। कार्यक्रम में मातृत्व के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर भी विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि मां केवल जीवन देने वाली नहीं बल्कि संस्कार, विश्वास और आस्था की प्रथम गुरु होती है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में मां की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने नारी सम्मान और महिला सशक्तिकरण को समाज की प्रगति का मूल आधार बताया। नैत्राणा संवाद कार्यक्रम का यह आयोजन केवल सम्मान समारोह तक सीमित न रहकर सामाजिक चेतना को जागृत करने वाला साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नारी शक्ति का सम्मान केवल एक दिवस तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यवहारिक रूप से अपनाना आवश्यक है। समारोह के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच, समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं। मातृत्व, नेतृत्व और सेवा के मूल्यों से परिपूर्ण यह आयोजन उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक अनुभव बनकर यादगार रहा।
















