-विचार की ताकत से विकसित भारत का सपना होगा साकार
-पंच परिवर्तन पर लेखन से समाज में आएगा जागरण
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है, और इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को मेरठ प्रांत के 100 से अधिक वरिष्ठ एवं नवोदित लेखकों की एक विशेष लेखन कार्यशाला का आयोजन मोहन नगर स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़ में हुआ, जिसमें लेखनी को राष्ट्र निर्माण का सशक्त हथियार बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में लेखकों की भूमिका निर्णायक होगी, क्योंकि लेखक ही विचारों को समाज की मुख्यधारा तक पहुंचाते हैं। उन्होंने नैरेटिव का मायाजाल पुस्तक का उदाहरण देते हुए बताया कि सही विमर्श का समाज में पहुंचना अत्यंत आवश्यक है। क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह ने कहा कि 1925 से लेकर आज तक संघ ने समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का कार्य बुराइयों की चर्चा करना नहीं, बल्कि अच्छाइयों का विकास और बुराइयों का समूल नाश करना है।
उन्होंने लेखकों को चेताया कि आज का संघर्ष वैचारिक धरातल पर है और राष्ट्र-विरोधी तत्वों का मुकाबला करने में लेखकों की अग्रिम पंक्ति की भूमिका है। भारतीय जनसंचार संस्थान के प्रो. प्रमोद कुमार सैनी ने कहा कि लेखन का उद्देश्य केवल रचना नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देना है। उन्होंने नई पीढ़ी में मूल्यों के हस्तांतरण, सकारात्मक उदाहरणों के प्रचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने पर जोर दिया। सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख तपन कुमार ने संघ के शताब्दी वर्ष के पंच परिवर्तनों स्व, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य और पर्यावरण को समाज परिवर्तन की आधारशिला बताया और लेखकों से इन विषयों पर तथ्यपरक सामग्री निर्माण का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लेखनी स्वांतसुखाय नहीं, समाज प्रबोधन के लिए होनी चाहिए। तकनीकी एवं प्रबंधन विशेषज्ञ शिवेश प्रताप ने लेखन की शैली, दृष्टिकोण, और विभिन्न माध्यमों में सामग्री निर्माण के तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने शताब्दी वर्ष के विशेष विषयों पर रचनात्मक लेखन को बढ़ावा देने के सुझाव दिए।
उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के प्रचार प्रमुख कृपा शंकर ने संघ के 36 समवैचारिक संगठनों के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संघ कभी अकेला नहीं चलता, वह सबको साथ लेकर आगे बढ़ता है, और शताब्दी वर्ष में यह यात्रा और व्यापक होगी। कार्यशाला में उपस्थित लेखकों को न केवल तकनीकी मार्गदर्शन मिला, बल्कि उन्हें यह प्रेरणा भी मिली कि उनकी लेखनी समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है। इस मौके पर संघ के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और लेखकों को राष्ट्र निर्माण के इस महाअभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। मॉडर्न कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के सचिव विनीत गोयल ने कहा कि कॉलेज को इस बात का गर्व है कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इतनी महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन हमारे परिसर में हुआ। यह लेखकों के लिए न केवल विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका तय करने का भी अवसर है।

















