रक्तदान की मिसाल बना यशोदा अस्पताल, विश्व रक्तदाता दिवस पर 120 यूनिट रक्त संग्रहित

-संजय नगर और नेहरू नगर इकाइयों में आयोजित शिविरों में उमड़ा मानव सेवा का जज्बा
-120 स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने बढ़ाया मदद का हाथ, जरूरतमंदों के लिए जुटाया जीवनदायी रक्त
-नियमित रक्तदान से बचाई जा सकती हैं अनगिनत जिंदगियां: डॉ. प्रमोद यादव

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर यशोदा अस्पताल समूह ने मानवता और सेवा की मिसाल पेश करते हुए दो भव्य स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया।  ‘मानवता की एक बूंद-रक्तदान करें, जीवन बचाएं’ विषय के साथ आयोजित इन शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रक्तदान किया और समाज के प्रति अपने दायित्व का परिचय दिया। यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एवं कैंसर संस्थान, संजय नगर तथा यशोदा अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, नेहरू नगर में आयोजित इन शिविरों के माध्यम से कुल 120 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जो भविष्य में अनेक जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचाने में सहायक होगा। इन रक्तदान शिविरों का आयोजन इम्यूनोहीमैटोलॉजी एवं रक्त आधान चिकित्सा विभाग (ब्लड सेंटर) के विभागाध्यक्ष डॉ. (पूर्व कमांडेंट) प्रमोद यादव के मार्गदर्शन में किया गया। अस्पताल प्रशासन द्वारा रक्तदाताओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, जिससे रक्तदान प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, सरल और सुविधाजनक रही। शिविरों में युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

संजय नगर स्थित यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एवं कैंसर संस्थान में आयोजित शिविर में 54 स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने रक्तदान किया, जबकि नेहरू नगर स्थित यशोदा अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में 66 लोगों ने रक्तदान कर मानव सेवा के इस महाअभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। दोनों केंद्रों पर रक्तदान को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। रक्तदाताओं ने इसे सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर डॉ. प्रमोद यादव ने कहा कि रक्त किसी भी कृत्रिम माध्यम से तैयार नहीं किया जा सकता, इसलिए जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता केवल स्वैच्छिक रक्तदाताओं पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, जटिल शल्य चिकित्सा, प्रसव के दौरान आने वाली आपात स्थितियों तथा थैलेसीमिया जैसे रोगों से पीडि़त मरीजों को समय-समय पर रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान समाज के लिए अमूल्य योगदान है।

उन्होंने कहा कि रक्तदान न केवल किसी व्यक्ति का जीवन बचाने का माध्यम है, बल्कि यह समाज में सहयोग, सेवा और संवेदनशीलता की भावना को भी मजबूत करता है। स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया एक यूनिट रक्तदान कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। उन्होंने लोगों से वर्ष में नियमित अंतराल पर रक्तदान करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। रक्तदान शिविर के दौरान चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को रक्तदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत नियमित स्वास्थ्य जांच के कारण रक्तदाताओं को अपने स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी भी मिलती है। विशेषज्ञों ने रक्तदान से जुड़े भ्रमों को दूर करते हुए लोगों को जागरूक किया। शिविरों में भाग लेने वाले सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। अस्पताल प्रशासन ने रक्तदाताओं के इस योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सहभागिता से ही सुरक्षित रक्त भंडारण सुनिश्चित किया जा सकता है।

रक्तदाताओं के चेहरे पर जरूरतमंदों की मदद करने की संतुष्टि स्पष्ट दिखाई दे रही थी। कार्यक्रम के समापन पर अस्पताल प्रशासन ने सभी रक्तदाताओं, चिकित्सकों, नर्सिंग कर्मियों, ब्लड सेंटर की टीम तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह अभियान केवल रक्त संग्रह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों में मानवता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान कर गया। यशोदा अस्पताल समूह की यह पहल समाज को यह संदेश देने में सफल रही कि रक्तदान वास्तव में महादान है, क्योंकि एक व्यक्ति का छोटा-सा योगदान किसी दूसरे के लिए जीवन का सबसे बड़ा उपहार बन सकता है।