-अटेवा के नेतृत्व में सैकड़ों कर्मचारियों ने आवाज बुलंद कर निकाली पदयात्रा
-राष्ट्र में एक संविधान, एक प्रधान, फिर दो विधान क्यों: मनीष शर्मा
गाजियाबाद। एनपीएस एवं निजीकरण के विरोध में एनपीएस निजीकरण भारत छोड़ो पदयात्रा को लेकर शुक्रवार को ऑल टीचर्स एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट धरना स्थल से पदयात्रा शुरू होकर जिला मुख्यालय तक पदयात्रा में सैकड़ों शिक्षक कर्मचारियों का कारवां जुटा। मांग से संबाधित मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन जिला प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। अटेवा लगातार पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष कर रहा है।
जिलाध्यक्ष/जिला संयोजक मनीष शर्मा ने बताया कि इस लड़ाई में शिक्षक, कर्मचारी व इंजीनियर एवं विभिन्न संगठनों का समर्थन मिल रहा है। पुरानी पेंशन शिक्षक-कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है। सरकार निजी हाथों में सौंपकर शिक्षक-कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करें। सभी दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्षों को पत्र भेजकर के पुरानी पेंशन के पक्ष में बात रखने की मांग की जा चुकी है। मगर आज तक कोई संतोषजन जवाब नही मिला। उत्तर प्रदेश में करीब 13.37 लाख व देश भर में 70 लाख से ज्यादा शिक्षक कर्मी एनपीएस की शोषणकारी व्यवस्था के अन्तर्गत हैं। जिस तरह से सरकारे इस मुद्दे पर संवेदनहीन है वह बहुत ही दुखद है।
उन्होंने कहा विधायक, सांसद अभी भी पुरानी पेंशन लेते है। जबकि 30 साल नौकरी करने के बाद भी कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलती है। यह कहां का न्याय है। सारी सुविधाओं को लेना कर्मचारी भी हकदार है। चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ के महासचिव अशोक कुमार व डिप्लोमा फार्मासिस्ट के अध्यक्ष संदीप बडोला ने कहा, एनपीएस और निजीकरण अभिशाप है। एनपीएस और निजीकरण से देश की जनता बर्बाद हो रही है। भारत मे पहले निजी को सरकारी किया जाता है वहीं अब सरकारी का निजीकरण किया जा रहा है जो सरासर गलत है। सरकार मांगों को पूरा नहीं करेगी तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे। हम लोग कर्तव्यनिष्ठा से अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमारे हित में कत्तई विचार नहीं कर रही है।
जिला महामंत्री संतोष कुमार पाल ने कहा 2004 से केंद्र के कर्मचारियों को और एक अप्रैल 2005 से राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर नई अंशदाई पेंशन व्यवस्था लागू की गई है। जिसमें कर्मचारियों कि 10 प्रतिशत कटौती कर बंदरबांट होने की पूरी संभावना है। पुरानी पेंशन योजना को बहाल किए जाने के मांग पर सांसद और सूबे के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने पत्र लिखकर पुरानी पेंशन को लागू करने का आश्वासन दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री का कार्यकाल खत्म होने को है। मगर उसके बाद भी मांग को पूरी करने की कवायद शुरू नहीं की गई। सरकार की वादाखिलाफी और पुराने पेंशन को बहाल करने की मांग को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ सीमा भड़ाना ने कहा कि एनपीएस के द्वारा कर्मचारियों के साथ प्रदेश एवं केन्द्र सरकार पैसा प्राइवेट कपनियों के पास जमा हो रहा है। जिसका कोई भी भविष्य नही है और न ही कोई गांरटी है। सरकारी परिसंपत्तियां देश की धरोहर है। संरकारी संस्थान रोजगार सृजन के माध्यम है। कार्यरत कर्मचारी देश के विकास में अपना योगदान दे रहे है। इनको निजी हाथों में सौंपना उचित नही है।
वहीं डिप्लोमा फार्मसिस्ट अध्यक्ष डॉ. एसपी वर्मा ने कहा कि निजीकरण को सरकारी क्षेत्र से दूर रखा जाए। पेंशन/निजीकरण पदयात्रा का आयोजन अटेवा गाजियाबाद के द्वारा किया गया। जिसमें डिप्लोमा फार्मेेसिस्ट एशोसिएशन गाजियाबाद, पंचायती राज कर्मचारी संघ, पीडब्लूडी नियमित वर्क चार्ज कर्मचारी संघ, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ हापुड, लेखपाल संघ गाजियाबाद, शारीरिक शिक्षा शिक्षक वेलफेयर एशोसिएशन यूपी, एरपी एशोसिएशन गाजियाबाद ने भी अपना समर्थन दिया है। पदयात्रा के दौरान मोहम्मद अब्बास, सुधीर त्यागी, संतोष पाल, प्रदीप चौहान, अजय गहलौत, नरेन्द्र शर्मा, महिपाल सिंह, जाकिर हुसैन, सतेन्द्र सिसौदिया, मोनिका प्रभा, सुनिता, अंजु सिंह, प्रतिभा गुप्ता, प्रमोद गोस्वामी, कनक सिंह त्यागी, राजेश वर्मा समेत सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।
















