पार्षदों को चाहिए 50000 रुपए मासिक भत्ता बोर्ड बैठक में उठाएंगे मुद्दा बोले भत्ते के साथ 1 करोड रुपए का बीमा भी जरूरी

पार्षदों की मांग है कि उन्हें के लिए प्रतिमाह स्टेशनरी, ऑफिस रेंट, बिजली बिल, फोन बिल, कार्यालय में एक सहायक कर्मचारी, चाय-कोल्ड ड्रिंक का खर्चा, कार का पेट्रोल, प्रत्येक वार्ड के लिए स्कूटर का पेट्रोल आदि भत्ता दिया जाए। पार्षदों का कहना है कि महापौर के लिए 1.20 लाख रुपए एवं पार्षदों के लिए 50 हजार रुपए प्रतिमाह का मासिक भत्ता निर्धारित होना चाहिए। अपनी मांगों के समर्थन में तर्क देते हुए पार्षदों ने कहा कि जब देश के सांसद, प्रदेश के विधायक, मंत्री अपनी तनख्वाह के लिए एकजुट हो सकते हैं तो हम महापौर व पार्षद एकजुट होकर क्यों नहीं मांग कर सकते है। हम भी जनप्रतिनिधि हैं और जनता द्वारा चुने जाते हैं।

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद।
नगर निगम की 7 मार्च यानि कि शुक्रवार को संभावित बोर्ड बैठक में हंगामा होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। बुधवार को पार्षदों ने बोर्ड बैठक से पूर्व अपने एजेंडे को अंतिम रूप देने के लिए संयुक्त बैठक की। पार्षदों ने मासिक भत्ता एवं 1 करोड़ रुपए का एक्सीडेंटल बीमा की मांग की है।नगर निगम सभागार में हुई बैठक में दर्जनों की संख्या में पार्षद शामिल हुए। बैठक करने के बाद सभी पार्षद एकत्रित होकर महापौर सुनीता दयाल के दफ्तर में उनसे मिलने पहुंचे। महापौर के समक्ष पार्षदों ने भत्ता एवं अन्य सुविधाएं दिए जाने की मांग की।

महापौर के समक्ष पार्षदों ने कहा कि महापौर और पार्षदों का 1 करोड़ का एक्सीडेंटल बीमा होनी चाहिए। वहीं, महापौर व पार्षदों के परिवार का 10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा होना चाहिए। महापौर व पार्षदों के लिए प्रतिमाह स्टेशनरी, ऑफिस रेंट, बिजली बिल, फोन बिल, कार्यालय में एक सहायक कर्मचारी, चाय-कोल्ड ड्रिंक का खर्चा, कार का पेट्रोल, प्रत्येक वार्ड के लिए स्कूटर का पेट्रोल आदि भत्ता की भी मांग की गई। पार्षदों की मांग है कि महापौर को 1.20 लाख रुपए व पार्षदों को 50 हजार रुपए प्रतिमाह भत्ता दिया जाए।

इसके साथ ही वर्तमान महापौर व पार्षदों की एक ग्रुप फोटो यादगार के रूप में सदन में लगनी चाहिए। महापौर के नेतृत्व में समस्त पार्षदों को टूर पर ले जाने की मांग की गई। बैठक में शामिल पार्षदों ने कहा कि देश के सांसद, प्रदेश के विधायक, मंत्री अपनी तनख्वाह के लिए एकजुट हो सकते हैं तो हम महापौर व पार्षद क्यों एक नहीं हो सकते है। पार्षदों ने कहा कि हम भी जनप्रतिनिधि हैं लेकिन हमारी आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। महापौर ने आश्वासन दिया कि सदन की बैठक में उक्त बिंदुओं को लेकर चर्चा कराई जाएगी।

डीगर बात यह है कि महापौर व पार्षदों को भत्ता एवं कोई भी सरकारी लाभ लेने का अधिकार नहीं है। इसका नगर निगम अधिनियम में भी कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि महापौर व पार्षदों को सरकार कैसे भत्ता व बीमा और कार्यालय समेत अन्य सुविधाएं दे पाएंगी। देखना होगा कि सदन की बैठक में इन सभी मुद्दों पर क्या फैसला होता हैं।