-नालों की सफाई में दिखा ‘सिस्टम का कमिटमेंट’, अब जलभराव नहीं बनेगा शहर की पहचान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर के जलभराव, गंदगी और अव्यवस्था के खिलाफ गाजियाबाद नगर निगम ने जिस संकल्प के साथ मोर्चा संभाला है, उसकी अगुवाई में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही वाली कार्यशैली का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। वर्षों से उपेक्षित नालों की सफाई अब सिर्फ कागजों में नहीं, ज़मीनी हकीकत बन चुकी है। निगम के स्वास्थ्य, निर्माण और जलकल विभाग संयुक्त मोर्चे पर महाअभियान चला रहे हैं और परिणाम भी चौंकाने वाले हैं। नगर आयुक्त ने नालों की सफाई को लेकर जो कमेटी गठित की है, उसमें जोनल अधिकारियों के साथ तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वह न सिर्फ सफाई कार्यों की निगरानी करें, बल्कि दैनिक प्रगति रिपोर्ट नगर आयुक्त कार्यालय को सौंपें। इससे पूरे अभियान को एक प्रोफेशनल टच मिला है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश के अनुसार, इंदिरापुरम क्षेत्र में 12 प्रमुख नालों की सफाई की जा चुकी है, जिनमें कई स्थानों पर पक्का निर्माण कर अतिक्रमण किया गया था।
आरआरटीएस के नाले से 8 टन सिल्ट निकालकर दिखाया गया कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक नियंत्रण साथ आते हैं तो कुछ भी असंभव नहीं। मोहन नगर में भी सफाई का काम अंतिम चरण में है। नगर आयुक्त ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा नालों की सफाई को एक बृहद अभियान के रूप में युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। निर्माण, जलकल व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें काम कर रही हैं। हर ज़ोन में सफाई की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। मेरा स्पष्ट निर्देश है कि 10 दिनों के भीतर अधिकतर नालों की सफाई पूरी हो जाए। सिल्ट को समय रहते उठाया जाए ताकि जलभराव जैसी समस्याओं से जनता को राहत मिल सके। मैं नागरिकों और व्यापारियों से अपील करता हूं कि वे नालों पर बने अतिक्रमण को स्वयं हटाकर नगर निगम का सहयोग करें, ताकि यह सफाई अभियान एक जन-अभियान बन सके।
महापौर की अपील: खुद हटाएं अतिक्रमण, शहर को दें राहत
नगर निगम ने उन नालों को चिह्नित किया है जिन पर वर्षों से पक्के निर्माण कर दिए गए हैं। अब ऐसे निर्माणों को पंचर करके मशीनों के जरिये सफाई कराई जा रही है। महापौर सुनीता दयाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर लोग सहयोग करें और स्वयं अतिक्रमण हटाएं तो निगम भी सहानुभूति के साथ कार्य करेगा।
प्रशासनिक सख्ती + जनसहयोग = जलभराव से मुक्ति का फॉर्मूला
निगम ने सफाई के बाद नालों से निकाली गई सिल्ट को जल्द से जल्द उठाने के निर्देश भी दिए हैं। यह उन जगहों पर गंदगी के दोबारा फैलने की गुंजाइश को खत्म करता है। इस बार सफाई केवल ‘दिखावा’ नहीं, एक सिस्टमैटिक प्रबंधन के तहत की जा रही है। नगर आयुक्त की कार्यशैली एक स्पष्ट संदेश देती है न ढील, न देरी; जनता की तकलीफ को समाधान में बदलने की पूरी तैयारी। महापौर और आयुक्त की टीम वर्क और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाली सोच गाजियाबाद को दिल्ली-एनसीआर का एक आदर्श नगर बनाकर उभार रही है।
















