विद्युत मजदूर संगठन एवं विद्युत संविदा मजदूर संगठन ने किया किसान आंदोलन का समर्थन

गाजियाबाद। विद्युत मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश एवं विद्युत संविदा मजदूर संगठन ने भी शुक्रवार को कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी की मांग को लेकर पिछले पिछले 16 दिनों से संघर्षरत किसानों को अपना समर्थन दिया। प्रान्तीय महामंत्री आशीष कुमार ने बताया कि गत गुरूवार को विद्युत मजदूर संगठन उप्र एवं विद्युत संविदा मजदूर संगठन उप्र की संयुक्त कार्यकारिणी की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अरुण कुमार (अध्यक्ष विद्युत मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश के दोनो संगठनों के सभी पदाधिकारियों ने भाग लिया। जिसमें धरनारत किसानों की मांगो का समर्थन किया गया। शुक्रवार को राजनगर क्षेत्रीय मुख्य अभियंता कार्यालय पर प्रान्तीय महामंत्री आशीष कुमार के नेतृत्व में शाम चार बजे संगठन के पदाधिकारियों ने शांति पूर्ण तरीके व सोसल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए सभा आयोजित कर किसानों की मांगों का समर्थन किया। प्रान्तीय महामंत्री आशीष कुमार ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 का ड्राफ्ट जारी होते ही इसका पुरजोर विरोध किया था। इस बिल में इस बात का प्रावधान है कि किसानों को बिजली टैरिफ में मिल रही सब्सिडी समाप्त कर दी जाए और बिजली की लागत से कम मूल्य पर किसानों सहित किसी भी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए। बिल में इस बात का प्रावधान किया गया है कि सरकार चाहे तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किसानों को सब्सिडी दे सकती है।

लेकिन इसके पहले किसानों को बिजली बिल का पूरा भुगतान करना पड़ेगा जो सभी किसानों के लिए संभव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि किसान संयुक्त मोर्चा के आवाहन पर चल रहे आंदोलन में कृषि कानूनों की वापसी के साथ किसानों की यह एक प्रमुख मांग है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 वापस लिया जाए। किसानों का मानना है की इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के जरिए बिजली का निजीकरण करने की योजना है। जिससे बिजली निजी घरानों के पास चली जाएगी और निजी क्षेत्र मुनाफे के लिए काम करते हैं। जिससे बिजली की दरें किसानों की पहुंच से दूर हो जाएंगी। किसानों की आशंका निराधार नहीं है इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट बिजली के निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए हैं। ऐसे में सब्सिडी समाप्त हो जाने पर बिजली की दरें 10 से 12 रुपए प्रति यूनिट हो जाएगी और किसानों को 8 से 10 हजार रुपये प्रति माह का न्यूनतम भुगतान करना पड़ेगा। इस दौरान प्रमुख पदाधिकारी जितेंद्र सिंह राना जिलाध्यक्ष, फईम उल्वारी क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष शमशाद अली, गोविंद, जमशेद व सुभाष गंगाशरण आदि मौजूद रहे।