नई शिक्षा नीति के विरोध में आइएमए के डॉक्टरों की हड़ताल शुरू

गाजियाबाद। आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति दिए जाने के विरोध में निजी चिकित्सकों की देशव्यापी हड़ताल शुरू हो गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं बंद कर दी हैं। पैथोलॉजी लैब व अल्ट्रासाउंड सेंटर भी बंद हो गए हैं। इससे दूर-दराज से आए मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। न तो उन्हें इलाज मिल रहा है और न जरूरी जांच हो पा रही हैं। गनीमत ये है कि इमरजेंसी व कोविड सेवाएं जारी रखी गई हैं। निजी चिकित्सकों के ओपीडी ने करने से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में सामान्य से अधिक भीड़ लगी हुई है। वहीं शिक्षा नीति के समर्थन में नेशनल इंटीग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) से जुड़े आयुर्वेदिक डाक्टरों ने अस्पताल खुला रखा और मरीजों का इलाज किया। इस बंदी से इमरजेंसी सेवाओं और कोविड मरीजों को मुक्त रखा गया। ज्यादातर डाक्टरों ने पहले से आने वाले मरीजों को हड़ताल की सूचना पहले दे रखी थी, इसलिए मरीजों को विशेष परेशानी नहीं हुई।

हालांकि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले नए मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा। आईएमए के अध्यक्ष डा. आशीष अग्रवाल का कहना था कि भारतीय चिकित्सा की केंद्रीय कांउसिल ने नया नियम लागू किया है। इसमें कहा गया है कि आयुर्वेद से पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले नए छात्रों को सर्जरी करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। नई विधा में 58 नई दवाइयों और सर्जिकल को जोड़ा गया है।

इससे एलोपैथी से पढ़ाई करने वाले डाक्टरों का मनोबल टूटेगा। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष शरद कुमार अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में होम्योपैथी, आयुर्वेद और एलोपैथी को अलग-अलग विधा बताकर इलाज की पद्धति भी अलग बताई है। पूर्व अध्यक्ष डा. वीबी जिंदल ने कहा कि सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मिक्सोपैथी बना दी गई है। इससे गंभीर मरीजों की जान को खतरा होगा। वहीं दूसरी तरफ नेशनल इंटीग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) से जुड़े डाक्टरों का कहना है कि आईएमए से जुड़े डाक्टर आयुर्वेद की पढ़ाई को दो वर्ष का पाठ्यक्रम बताकर अज्ञानता का परिचय दे रहे हैं। इसीलिए ये लोग सरकार द्वारा लाए गए नए का कानून का विरोध कर रहे हैं। जबकि एलोपैथी की तरह ही आयुर्वेद की भी पढ़ाई होती है। नई व्यवस्था के समर्थन में आयुर्वेद से जुड़े डाक्टरों ने अपनी क्लीनिक और अस्पताल खोलकर मरीजों का इलाज किया। आयुर्वेदिक डाक्टरों ने आईएमए के निर्णय का विरोध जताया।