गाजियाबाद में जीडीए की डिजिटल क्रांति, अब मेल पर मिलेगा आवंटन पत्र

• “पहल पोर्टल” से घर बैठे आवंटन और म्यूटेशन लेटर की सुविधा शुरू
• QR कोड से होगा सत्यापन, फर्जी दस्तावेजों की संभावना खत्म
• बकाया राशि, भुगतान तिथि और चालान विवरण भी ऑनलाइन उपलब्ध
• कार्यालय के चक्कर खत्म, एक क्लिक में मिलेगी ज़रूरी जानकारी
•  आवंटियों की सालों पुरानी परेशानी अब होगी खत्म: प्रदीप कुमार सिंह
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने अपनी प्रशासनिक प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए तकनीक के माध्यम से आवंटियों को उनकी सुविधाओं का अधिकार सीधे उनके घर तक पहुंचाने की पहल की है। अब आवंटी बिना कार्यालय आए, केवल एक क्लिक पर अपने आवंटन पत्र (Allotment Letter) और म्यूटेशन लेटर को डिजिटल माध्यम से, सीधे ईमेल के जरिए प्राप्त कर सकेंगे। यह व्यवस्था जीडीए के उपाध्यक्ष अतुल वत्स के नेतृत्व और दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिनके दिशा-निर्देशन में यह नवाचार लागू किया गया है। इसका मूल उद्देश्य  दस्तावेज़ी झंझट, लंबी कतारों और कार्यालयी दौड़-धूप से निजात दिलाकर, एक पारदर्शी, सरल और तकनीक-सक्षम नागरिक सेवा प्रणाली का निर्माण। इस नई सुविधा के पहले परीक्षण के तहत मंगलवार को एक आवंटी को उसके रजिस्टर्ड ईमेल पर सफलतापूर्वक आवंटन पत्र भेजा गया, जिसे पूरी प्रक्रिया में सहजता और विश्वसनीयता के साथ संपन्न किया गया। यह केवल एक शुरुआत है आगामी दिनों में यह सुविधा जीडीए के सभी आवंटियों के लिए नियमित और स्थायी व्यवस्था के रूप में लागू कर दी जाएगी, जिससे हजारों लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा।आवंटी को आवेदन करते समय मोबाइल नंबर के साथ ईमेल आईडी दर्ज करनी होगी।
आवंटन पत्र में QR कोड मौजूद रहेगा, जिससे उसकी प्रामाणिकता की जांच कभी भी, कहीं से भी की जा सकती है।
आवंटी अपनी संपत्ति की स्थिति, बकाया राशि, चालान, और भुगतान की तिथि भी पोर्टल से देख सकेगा।
यह पूरी प्रक्रिया जीडीए के “पहल पोर्टल” के माध्यम से संचालित की जा रही है।
क्या होंगे दूरगामी फायदे
आवंटियों को जीडीए कार्यालय के चक्कर लगाने से मुक्ति
फर्जी दस्तावेज़ों की पूरी तरह रोकथाम
डिजिटली प्रमाणित आवंटन पत्र और म्यूटेशन
पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन
अन्य नगर विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल बनेगा गाजियाबाद
प्रदीप कुमार सिंह
जीडीए अपर सचिव
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में लगातार यह शिकायतें आती थीं कि आवंटियों को मामूली कामों जैसे आवंटन पत्र प्राप्त करना, म्यूटेशन या भुगतान विवरण जानने के लिए विभाग में कई टेबलों के चक्कर लगाने पड़ते थे। यह व्यवस्था उसी पीड़ा का समाधान है। ‘पहल पोर्टल’ ने अब इन समस्याओं को तकनीक से जोड़ते हुए समाप्त कर दिया है। हमारी कोशिश है कि आवंटियों को सम्मान और सुविधा दोनों मिले। प्राधिकरण की सभी शाखाओं में इस नई प्रणाली को लेकर लगातार फीडबैक लिया जा रहा है और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है जीडीए को एक डिजिटल, पारदर्शी और उत्तरदायी संस्थान बनाना।
प्रदीप कुमार सिंह
अपर सचिव,  जीडीए