-पंचायत चुनाव के बाद सामने आए गांवों के हालात
गाजियाबाद। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में गांवों की नई तस्वीर बदलती हुई सामने आई है। खास बात यह है कि जिले में 161 ग्राम पंचायतों मेंअनारक्षित वर्ग की 59 सीटों में से मात्र 25 सीटों पर ही सामान्य वर्ग के लोग चुनाव में जीत हासिल कर पाए हैं। ग्राम प्रधान में अन्य पिछड़ा वर्ग(ओबीसी)के प्रत्याशी अनारक्षित 59 सीटों में भी 29 प्रत्याशी ही जीत पाए। इनमें 9 महिलाएं भी शामिल हैं। जबकि सामान्य वर्ग की सिर्फ 5 महिलाएं ही ्रग्राम प्रधान बनने में कामयाब हो पाई। हैरतअंगेज रूप से अनारक्षित 5 सीटों पर अनुसूचित जाति के प्रत्याशी जीते हैं। गांवों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग सामान्य वर्ग से ज्यादा प्रभावशाली के तौर पर सामने आ रहे हैं। इस बदलाव की वजह दूसरे वर्ग के लोगों का अपने अधिकार के प्रति जागरूक होना और विकास के पथ पर कदम बढ़ाना है। खासतौर पर गांवों में पिछड़ा वर्ग की महिलाओं की स्थिति में हुआ है। इन महिलाओं ने तय आरक्षित सीटों से ज्यादा पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इन महिलाओं के सामने सामान्य वर्ग के पुरूष और महिलाएं अपनी सीट को नहीं बचा पाए। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सामान्य वर्ग के सापेक्ष पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति-जनजाति के काफी संख्या में ग्राम प्रधान चुने गए। विकास खंड भोजपुर:अनुसूचित जाति-5 महिला,पिछड़ा वर्ग-महिला 4, पुरूष-9,पिछड़ा वर्ग-8। विकास खंड मुरादनगर में अनुसूचित जाति महिला-3,पिछड़ा वर्ग-4 महिला,10 महिला में 9,7 अनारक्षित 18,विकास खंड रजापुर में अनूसूचित जाति महिला 3,पिछड़ा वर्ग-3 महिला,विकास खंड लोनी में अनुसूचित जाति महिला-3,पिछड़ा वर्ग महिला-3,9 पिछड़ा वर्ग-6,12महिला 6 जीती,3 अनारक्षित कुल योग वर्ग अनूसूचित जाति महिला 11 में 13 जीती,पिछड़ा वर्ग महिला 14,अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला होने के बावजूद चुनाव में जीत हासिल की। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिला वर्ग के लिए आरक्षित 30 सीटों में से 10 सीटों पर आरक्षित वर्ग की महिलाओं ने चुनाव लड़कर जीत हासिल की। अनारक्षित वर्ग की 59 सीटों पर आरक्षित वर्ग 34 सीटों पर जीत हासिल की। इनमें 29 अन्य पिछड़ा वर्ग और 5 अनुसूचित जाति के हैं। जबकि सामान्य वर्ग के लोग महज 25 सीटों पर ही जीत हासिल कर सके। इसका साफ संदेश है कि गांवों में अन्य वर्ग की स्थिति में चुनाव के दौरान अब सुधार तेजी से हुआ है। दूसरे वर्ग के लोग भी प्रभावशाली बन रहे हैं,उनका जनाधार बढ़ रहा है। चक्रानुक्रम के माध्यम से आरक्षण तय किए जाने का भी फायदा भी मिला है। कई ग्राम पंचायतें ऐसी थीं, जिनमें अनारक्षित वर्ग के वोट की अपेक्ष दूसरे वर्ग के वोट ज्यादा थे।















