केंद्रीय बजट से व्यापारियों की बंधी आस

गाजियाबाद। केंद्र सरकार की तरफ से पेश होने वाले बजट पर व्यापारियों, दुकानदारों और आढ़तियों की निगाहें टिक गई हैं। कोरोना लॉक डाउन के दौरान देशभर में आवश्यक सामानों की आपूर्ति को बनाए रखने में व्यापारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बावजूद भी विभिन्न आर्थिक पैकजों में व्यापारियों को कोई भी आवंटन न होने से निराश देशभर के व्यापारियों ने कल संसद में प्रस्तुत होने वाले केंद्रीय बजट पर भारी उमीदें बांधी हुई हंै। सरकार अपनी आय के स्त्रोत बढ़ाने के लिए संभवत कुछ कर लगाने की घोषणा कर सकती है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा की कर कहां लगेगा और उसका व्यापार एवं उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा। बजट में एक नेशनल ट्रेड पालिसी फॉर रिटेल ट्रेड, ई कॉमर्स पालिसी एवं एक ई कॉमर्स रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन तथा एक वोलंटरी डिस्क्लोजऱ स्कीम (वीडीएस) भी घोषित होनी जरूरी है, लेकिन वीडीएस स्कीम के अंतर्गत घोषित करने वालों से कोई पूछताछ न होने का आश्वासन भी दिया जाना आवश्यक है, जिससे देश में कथित रूप से छिपे हुए कारोबार को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री तिलक राज अरोड़ा और महानगराध्यक्ष उदित मोहन गर्ग का कहना है कि व्यापारी वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं और उन्हें उम्मीद है की बजट में व्यापारियों को बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से कम ब्याज पर तथा आसान शर्तों पर कारोबार के लिए धन मिले। इसकी नीति बजट में अवश्य घोषित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल पर वोकल तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने के लिए देश के व्यापारियों, कारीगरों, हस्तशिल्पी एवं देश की प्राचीन कला का काम करने वाले लोगों को इस अभियान से जुडऩे के लिए प्रोत्साहित करने हेतु भी एक व्यापक योजना बजट में घोषित होनी चाहिए। वहीं, देश में महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए भी बजट में एक विशेष प्रावधान की उम्मीद व्यापारी लगाए बैठें हैं। देश में घरेलू व्यापार पर लगे लगभग 28 तरह के लाइसेंस के स्थान पर आधार की तरह केवल एक लाइसेंस लागू करने की घोषणा भी बजट में होनी चाहिए। देश में लगभग 8.5 करोड़ व्यापारी हैं, जो सालाना 80 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करते हैं और लगभग 40 करोड़ लोगों को रोजगार देते हंै।