गाजियाबाद। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत तम्बाकू रोकथाम के लिये कोटपा अधिनियम 2003 के तहत कार्यवाही की जाती है। जनपद गाजियाबाद तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ एवं यूपीवीएचए (उप्र बॉलिन्टरी हैल्थ एसोसिएशन उप्र लखनऊ) संयुक्त रूप से इस पर कार्यवाही कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग व यूपीवीएचए से सहयोगात्मक रूप से नगर निगम के अपर नगर आयुक्त से इस चर्चा की गई। जिसमें बताया गया है कि इस विषय पर नगर निगम द्वारा सार्वजनिक सूचना पूर्व में प्रकाशित की जा चुकी है। तम्बाकू विकताओं को वेंडर लाइसेंस की प्रणाली को विस्तार पूर्वक समझाया गया है। इसके कियान्वयन करने के लिए अनुरोध किया गया है। अपर नगर आयुक्त द्वारा वेंडर लाईसेंस की प्रक्रिया को गति प्रदान करने हेतु नगर निगम की आगामी बैठक में प्रस्ताव को प्रस्तुत करने की कार्यवाही की जायेगी। शहर में तम्बाकू बेचने के लिए अब नगर निगम से लाईसेंस लेना अनिवार्य होगा। नगर निगम जल्द ही वेंडर लाईसेंस प्रावधान लागू करने की तैयारी में है। इस सम्बंध में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य द्वारा समस्त नगर आयुक्त को पत्र भेजा है। नोडल अधिकरी, एनटीसीपी सेल, गाजियाबाद एवं जनपद सलाहकार ने बताया की तम्बाकू की वेंडर लाईसेंसिग प्रक्रिया न होने के कारण ज्यादातर दुकानदार तम्बाकू बेचते है। साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से इसका प्रचार भी करते है, जो कि कोटपा अधिनियम 2003 के कानूनों का उल्लघंन है। जिससे युवा पीढी इसकी तरफ आकर्षित होती है। तम्बाकू के इस्तेमाल से प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख से अधिक लोग अपनी जा गवा बैठते है। इससे कैंसर व अन्य गम्भीर बिमारयाँ बढ़ रही है। कोरोना महामारी के चलते तम्बाकू का इस्तेमाल करना कोरोना के संक्रमण को तेजी से फैलाने में मदद करता है। सभी प्रकार के नशे से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा एमएमजी जिला चिकित्सालय में तम्बाकू उन्मूलन केन्द्र संचालित किया जा रहा है। जहाँ तम्बाकू छोडऩे के लिए निशुल्क परामर्श व काउन्सलिंग की जाती है।















