रेलवे पुलिस की नाक के नीचे 7 साल से पुलिसवाला बनकर कर रहा था लूटपाट

-लाखों के माल के साथ सरगना संदीप सांसी गिरफ्तार

गाजियाबाद। रेलवे स्टेशन और एक्सप्रेस ट्रेनों में पिछले 7 साल से लगातार पुलिसवाला बनकर यात्रियों के सामानों की चोरी एवं लूटपाट की वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने पर्दाफाश कर सरगना को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले सात साल अपने मंसूबों को अंजाम देता रहा, मगर इसकी भनक तक रेलवे पुलिस को नही लगी, या फिर यह कहें सब जानकार अन्जान बनें रहे। जीआरपी ने इसके पास से यात्रियों के चोरी किए गए लाखों रुपए के सोने का गले का हार, 5 अंगूठी सोने, 3 सोना चेन, झाले सोना, 19 हजार रुपए एवं चोरी का मोबाइल बरामद किया है।
जीआरपपी सीओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पकड़ा गया गिरोह का सरगना संदीप सांसी पुत्र वीर साला उर्फ गीगा सांसी निवासी 59ए फ्रेंंडस एंक्लेव सुल्तानपुरी राजपार्क दिल्ली है। इसके खिलाफ चोरी, मादक पदार्थों की तस्करी व गैंगस्टर एक्ट के तहत जीआरपी बनारस थाने में करीब 10 केस दर्ज हैं। जीआरपी थाना प्रभारी निरीक्षक अमीराम सिंह ने एसएसआई मीरा पंवार, जितेंद्र कुमार टीम के साथ रेलवे स्टेशन गौशाला फाटक के पास से गिरफ्तार किया गया। जीआरपी थाना प्रभारी अमीराम सिंह ने बताया कि पकड़ा गया शातिर चोर संदीप पिछले 7 साल से रेलवे स्टेशन, ट्रेनों में यात्रियों का सामान चोरी कर फरार हो जाता था। छह साल पहले इसे वाराणसी में जीआरपी ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर 28 जून को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाना के पीछे प्लेटफार्म नंबर-4 पर कालका एक्सप्रेस से उतर रहे मेरठ निवासी मुशियार अली के बैग से 10 लाख रुपए के गहने चुराए थे। मुशियार पश्चिम बंगाल में परिचित की शादी में गए थे। वहां से पत्नी व बेटी संग लौटते समय संदीप व उसके साथियों ने उनके साथ वारदात की। संदीप ने 29 अप्रैल को दिल्ली से भुवनेश्वर जा रहे संजय कुमार का मोबाइल चोरी कर लिया था। शातिर चोर होने के साथ कद-काठी ठीक है और वह पुलिस व सेना के जवानों की तरह हेयर स्टाइल रखता है। ट्रेनों के एसी व स्लीपर कोच में घूमकर पहले रैकी करता था। उसके बाद पेंचकस से चेन का लाक तोड़कर बैग टटोलता है और फिर उतरते समय सामान उतरवाने की बात कहता है। लोगों के इन्कार करने पर खुद को पुलिस स्टाफ बताता है। इसके बाद भी लोग नहीं मानते तो ट्रेन के गेट पर जल्दबाजी व आपाधापी दिखाते हुए बैग काटकर सामान चोरी कर फरार हो जाता था। आरोपी इतना बड़ा शातिर था कि रेलवे पुलिस को इसकी भनक तक नही लगी। रेलवे पुलिस की नाक के नीचे 7 साल लगातार लूटपाट की हो रही वारदातों पर अकुंश लगाने में पूरी तरह नाकाम रही। यह फिर यह कहना ठीक होगा कि लूट पीडि़तों की शिकायत का पुलिस ने संज्ञान नही लिया।