दो दशक से नहीं बढ़ा है दुकानों का किराया
गाजियाबाद। नगर निगम अब डीएम सर्किल रेट के आधार पर अपनी दुकानों का किराया वसूल करेगा। पिछले 2 दशक से इन दुकानों का किराया नहीं बढ़ा है। भविष्य में सर्किल रेट के हिसाब से किराए का निर्धारण होगा। नगर निगम की पिछले दिनों हुई कार्यकारिणी बैठक में भी सर्किल रेट के हिसाब से किराया बढ़ाने पर निर्णय हो चुका है। ऐसे में नगर निगम अब अपनी दुकानों का किराया संशोधित कर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। ऐसी दुकानों से निगम प्रीमियम भी लेगा जो दुकानें अब मूल आवंटियों के पास नहीं हैं। इसके लिए निगम ने सर्वे शुरू करा दिया है। नगर निगम की शहर में 1276 दुकानों में करीब 650 दुकानों पर नंबरिंग भी करा दी गई है। कविनगर, विजय नगर, वसुंधरा, मोहन नगर और सिटी जोन क्षेत्र में नगर निगम की 1276 दुकानें हैं। करीब दो दशकों से इन दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। इन दुकानों का किराया एक हजार से दो हजार तक है,जबकि इन्हीं बाजारों में निजी दुकानों का किराया 10 से 20 हजार रुपए तक का हैं। नगर निगम अब इन दुकानों का किराया बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि निगम दुकानों के किराए में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने के लिए डीएम सर्किल रेट की ओर से तय किए गए किराया दर के आधार पर किराया लिया जाएगा। वर्ष-2014 में शहर में 450 रुपए प्रति वर्ग मीटर की किराया दर थी। नगर निगम अब जिला प्रशासन से 2020 की नई किराया दर लेगा। इसके आधार पर किराया निर्धारण किया जाएगा। उनका कहना है कि निगम की अधिकांश दुकानों को मूल आवंटियों ने या तो स्टांप पेपर पर लिखवा कर दूसरों को दे दिया है या किराए पर दे दी हैं। नगर निगम ऐसी दुकानों की पहचान कर रहा है। ऐसे शिकमी किराएदारों (मूल आवंटियों से अलग किराएदार) से प्रीमियम वसूला जाएगा। प्रीमियम की रकम का निर्धारण भी सर्किल रेट के हिसाब से तय होगा। जिला प्रशासन की दरों के मुताबिक शहर में फिलहाल किराया दर 70 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर है। इसके आधार पर ही प्रीमियम किराया तय किया जाएगा। नगर निगम की सभी दुकानों का सर्वे कराने के बाद इनमें से करीब 650 दुकानों पर नंबरिंग भी करा दी गई है। सर्वे पूरा होने के बाद दुकानों का किराया और प्रीमियम तय किया जाएगा।
















