-बेड खाली होने के बाद भी लगाया बेड फुल का बोर्ड, एक लाख का लगाया जुर्माना
गाजियाबाद। जनपद में बढ रहे कोरोना संक्रमित मरीजों के चलते निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल बनाए जाने पर अब प्राइवेट अस्पतालों की पोल खुलनी शुरू हो गई है। जिले के नोडल अधिकारी डॉ. सेंथिल पांडियन सी के निर्देश पर टीमों का अस्पताल में निरीक्षण जारी है। ऐसा ही एक मामला वंसुधरा स्थित ली क्रिस्ट हॉस्पिटल में देखने को मिला, जहां खाली बेड होने के बाद भी बेड फुल का बोर्ड लगा हुआ था। इसके अलावा अस्पताल में बॉयो मेडिकल वेस्ट एवं जनरल वेस्ट का निस्तारण सिंगल विंडों पाया गया। यह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट अधिनियिम-2016 का उल्लंघन है, इस मामले में नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर के आदेश पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश कुमार ने अस्पताल पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 48 घंटे में प्रबंधन को अपना स्पष्टीकरण के निर्देश दिए है। अगर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
सोमवार को नोडल अधिकारी के निर्देश पर नगर आयुक्त महेंन्द्र सिंह तंवर पीपीई किट पहनकर अस्पताल के वार्ड में पहुंचे। नगर आयुक्त को ऑक्सीजन एवं अस्पतालों का नोडल अधिकारी बनाया गया है। नगर आयुक्त एवं एडीएम सिटी शैलेंद्र कुमार सिंह दोनों नोडल है। ली क्रिस्ट हॉस्पिटल ने सभी बेड भरे हुए बताए थे। गलत सूचना देने पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर,एडीएम सिटी शैलेंद्र कुमार सिंह, पर नगर मजिस्ट्रेट खालिद अंजुम, अपर नगर मजिस्ट्रेट सेकेंड विनय सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेशन कुमार ने अस्पताल को औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान हॉस्पिटल की पोल खुल गई। निरीक्षण में हॉस्पिटल में 10 बेड खाली मिले। जबकि गेट पर बेड फुल का बोर्ड लगा रखा था। कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन, अस्पतालों में बेड और दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। शहर में बढ़ते कोरोना मरीजों को गत दिनों में ऑक्सीजन, इंजेक्शन, आईसीयू बेड उपलब्धता एवं मेडिकल सुविधाओं की ज्यादा परेशानी हो रही हैं। इसको लेकर नगर आयुक्त ने अधिकारियों के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया। कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए बेड की उपलब्धता, ऑक्सीजन, दवाई आदि की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने अस्पताल में कुल बेड की संख्या, ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड की संख्या, मरीजों की संख्या, ऑक्सीजन सिलेंडर की संख्या आदि मेडिकल सुविधाओं को लेकर अस्पताल के प्रबंधकों से वार्ता की। निरीक्षण के दौरान कई प्राइवेट अस्पतालों की लॉग बुक से जानकारी प्राप्त हुई कि 30 से 45 मिनट में लगभग 20 ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता है, गैस टेक्नीशियन द्वारा बताया गया कि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध हो रही है, अस्पतालों के स्टोर में ऑक्सीजन सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में पाए गए। ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध होने और प्रति बेड ऑक्सीजन की आवश्यकता के आधार पर ऑक्सीजन डिमांड रिपोर्ट तैयार की गई, ताकि ऑक्सीजन की सप्लाई लगातार की जा सके। मरीजों को ऑक्सीजन की समस्या उत्पन्न न हो। अस्पताल में आईसीयू बेड 10 खाली पाए गए। मरीजों को भी गाजियाबाद से बाहर वाले मरीजों का रजिस्ट्रेशन पाया गया। इस पर आपत्ति जताई। मौके पर अस्पताल प्रबंधन को बुलाने पर भी मौके अस्पताल से कोई जिम्मेदार स्टाफ वहां उपस्थित नहीं हुआ। इंतजार करने के बाद अधिकारियों के समक्ष अस्पताल के जीएम ऑपरेशन सुरेश आए। इससे मरीजों के प्रति अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का दर्शाता है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह ने बताया कि मरीजों को अगर किसी प्रकार की अस्पताल में कोई परेशानी हो रही है तो बताएं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोरोना संक्रमित मरीजों को प्राथमिकता पर इलाज देने और शहर के अस्पतालों के प्रबंधकों से ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी आती है तो तत्काल प्रशासन को अवगत कराए। जिले में कोरोना संक्रमण बेकाबू होता जा रहा हैं। मई में 3 दिन में करीब 45 लोगों की कोरोना सेे मौत हो चुकी हैं। जबकि इन दो दिनों में 2289 नए संक्रमित मिले हैं। इसके इन मौत के साथ जिले में कोरोना से होने वाली मौत की संख्या बढ़कर 251 हो गई है। कोरोना की दूसरी लहर में होम आइसोलेट होने वाले बिना लक्षण वाले मरीजों को भी स्वस्थ होने में अधिक समय लग रहा है।















