-महर्षि चरक जयंती आयुर्वेद की विकास यात्रा
गाजियाबाद। आयुर्वेद की विकास यात्रा में महर्षि चरक का महत्वपूर्ण योगदान है। महर्षि चरक कुषाण राज्य के राजवैद्य थे। इनके द्वारा रचित चरक दीपजं एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रन्थ है। इसमें रोगनाशक एवं रोगनिरोधक दवाओं का उल्लेख है साथ ही सोना, चाँदी, लोहा, पारा आदि धातुओं के भस्म एवं उनके उपयोग का वर्णन भी मिलता है। महर्षि चरक की गणना भारतीय औषधि विज्ञान के मूल प्रवर्तकों में होती है। यह बातें शुक्रवार को प्राइवेट चिकित्सक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वाधान में आयुर्वेद विशारद महर्षि चरक की जयंती के मौके पर महाराज अग्रसेन वाटिका में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थापक अध्यक्ष बीके शर्मा हनुमान ने कही।
उन्होंने कहा महर्षि चरक की शिक्षा तक्षशिला में हुई थी। उनके द्वारा रचा हुआ ग्रंथ चरक संहिता आज भी आयुर्वेद का अनुपम और अद्वितीय ग्रंथ माना जाता है। आयुर्वेद, ‘आयुÓ और ‘वेदÓ, दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है जीवन विज्ञान व समग्र जीवन पद्धति। इसके अनुसार जीवन का उद्देश्यों है धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिये स्वास्थ्य को उत्तम बनाये रखना। आयुर्वेद, शरीर के भीतर तीनों कारकों के मध्य संतुलन स्थापित करता है। इन तत्वों के संतुलन से मानव शरीर में कोई भी बीमारी नहीं हो सकती, परन्तु इन कारकों के असंतुलन से बीमारियां शरीर पर हावी होने लगती है। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर विशेष जोर देता है ताकि मनुष्य सभी प्रकार के रोगों से मुक्त रह सके।
संयोजक डॉ एके जैन ने सभी से आह्वान किया कि स्वस्थ रहने के लिये आयुर्वेद को अपनायें क्योंकि यह एक समग्र चिकित्साशास्त्र है। यह रोग के प्रबंधन के साथ रोगों की रोकथाम और रोगों को उत्पन्न करने वाले मूल कारणों को भी समाप्त करता है। आईये आयुर्वेद को अपनाये और स्वस्थ जीवन पाये। इस मौके पर डॉ सुनीता बहल, डॉक्टर संजय कुशवाहा, डॉक्टर नूर मोहम्मद, डॉक्टर रुखसाना परवीन, डॉ मनोज कुमार, डॉक्टर केपी सरकार, डॉ शीला रानी, शहनाज परवीन, डॉक्टर सुभाष शर्मा, दिलीप कुमार, मिलन मंडल, डॉक्टर एनएस तोमर, बबलू प्रजापति, डॉक्टर मोहित वर्मा, डॉ शहनवाज आदि उपस्थित रहे।















