चीफ इंजीनियर बने संजय चौहान, प्रदेश सरकार ने जारी किया आदेश

नगर निकाय विभाग के कुशल इंजीनियरों में होती है संजय चौहान की गिनती

उदय भूमि ब्यूरो
लखनऊ/बरेली। बरेली नगर निगम में तैनात वरिष्ठ इंजीनियर संजय चौहान को प्रोन्नति मिल गई है। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (अधिशासी अभियंता) के पद से पदोन्नत होकर वह चीफ इंजीनियर (मुख्य अभियंता) बन गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। संजय चौहान बेहद काबिल इंजीनियर हैं। नगर निकाय विभाग के कुशल इंजीनियरों में उनकी गिनती होती है। काम के प्रति समर्पण और दायित्वों का बखूबी ढंग से निर्वहन करने के कारण वह हमेशा उच्चाधिकारियों की नजरों में रहते हैं। वह गाजियाबाद नगर निगम में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। गाजियाबाद निगम में उनके कार्यकाल को आज भी सराहा जाता है। कोई भी जिम्मेदारी मिलने पर तत्परता से उसका निर्वहन करने से कभी पीछे नहीं रहे। गाजियाबाद में उन्होंने बतौर अधिशासी अभियंता बेहतर तरीके से काम किया था। उनके कार्यकाल में किसी प्रकार का कोई विवाद सामने नहीं आया था।

1992 में जीबी पंत यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री प्राप्त की
वरिष्ठ इंजीनियर संजय चौहान ने वर्ष 1992 में जीबी पंत यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री हासिल की थी। तदुपरांत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) से वर्ष 1994 में एमटेक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने नौकरी की शुरुआत केंद्र सरकार की प्रतिष्ठित संस्था रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस (राइट्स) से बतौर सिविल इंजीनियर शुरू की। उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन के जरिए नगर निकाय इंजीनियरिंग संवर्ग के 1999 बैच में संजय चौहान का चयन हुआ।

इलाहाबाद नगर निगम में हुई थी पहली पोस्टिंग

इलाहाबाद नगर निगम में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर (एई) पहली पोस्टिंग हुई। इलाहाबाद के बाद उन्होंने मेरठ और मुरादाबाद सहित अन्य नगर निगम में काम किया। वर्ष 2012 में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (अधिशासी अभियंता) के पद पर पदोन्नत हुए। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के रूप में भी इनकी पहली पोस्टिंग इलाहाबाद नगर निगम में हुई। इलाहाबाद के बाद मेरठ, गाजियाबाद और बरेली में तैनात रहे। बरेली में तैनाती से पहले वह गाजियाबाद नगर निगम में तैनात थे। संजय चौहान का सेवाकाल पूरी तरह से निर्विवाद रहा है। उन्हें समय से परिणाम देने और समस्या का समाधान करने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। नगर निकाय विभाग के इंजीनियरिंग सेवा के कुशल अधिकारियों में गिने जाने वाले संजय चौहान ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर रहते हुए लंबे समय तक बरेली में चीफ इंजीनियर का चार्ज भी संभाला है। साहित्य से है विशेष लगाव 
इंजीनियर संजय चौहान को लिखने पढ़ने का शौक है।  साहित्यकारों के साथ रहना और कविता लिखना संजय चौहान को पसंद है। वह काफी समय से प्रख्यात शायर वसीम बरेलवी के संपर्क में रहे है। दोनों के मध्य काफी अच्छे रिश्ते रहे हैं। संजय चौहान की काबिलियत और एक इंजीनियर का कला साहित्य के प्रति जुनून से बरेलवी भी खासे प्रभावित हुए थे।

कोरोना काल में लिखी कविता हुई थी खूब वायरल
कोरोना संक्रमण को रोकने का एकमात्र रास्ता सोशल डिस्टेंसिंग है। लेकिन काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो जानबूझकर इसकी धज्जियां उड़ाते हैं। ऐसे लोगों को समझाने के लिए पुलिस को कई बार डंडे का सहारा लेना पड़ता है। इन्हीं परिस्थितियों को बयां करते हुए इंजीनियर संजय चौहान ने कोरोना काल और लॉकडाउन को लेकर एक कविता लिखी थी। यह कविता फेसबुक, वाट्सअप सहित कई सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। संजय चौहान कविता में बड़े ही रसात्मक शब्दों का चयन करते हैं। उनकी कविताएं पाठकों को वर्तमान परिदृश्य बयां करने के साथ हास्य रस की अनुभूति भी कराता है।पड़े जब डंडे टांगो पर, हर सूरमा का दम निकले। बहुत निकले थे शुरू में लोग, मगर कुछ दिन से कम निकले। यह कविता लोगों ने खूब शेयर किए थे।