गाजियाबाद। एमएमएच महाविद्यालय शिक्षक संघ चुनाव में शिक्षक संघ पहली बार 2 गुट में बंट गया है। चुनाव प्रक्रिया को सही मानते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय शिक्षकसंघ मूटा ने एक गुट को मान्यता दे दी है। इसके विरोध में एमएमएच कॉलेज शिक्षक संघ के दुसरे गुट ने विरोध जताया है। विरोधी गुट ने शिक्षक संघ चुनाव में मूटा के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कई प्रश्र पूछे है। विरोधी गुट का कहना है कि मूटा द्वारा जिस तरह गैर लोकतांत्रिक तरीके से एक गुट को मान्यता दी गई है वह गलत है। उनका आरोप है कि एक तरफ जहां महाविद्यालय से जो लोग प्राचार्य के पद पर चुने जाने के बाद लिओन पर दूसरे कॉलेज चले गए, उन्हें अपने पैरेंट कॉलेज में वोट देने से वंचित रखा गया, जो की परंपरा के विरुद्ध है। वहीं, मूटा के वह पदाधिकारी जो अब अन्य कॉलेजों में प्राचार्य पद पर नियुक्त हैं, जिन्हें नैतिक आधार पर मूटा से इस्तीफा दे देना चाहिए था उन्होंने गैर लोकतांत्रिक तरीके एवं निजी स्वार्थ के कारण दो में से एक गुट को मान्यता प्रदान कर दी।
निवेदिता मलिक जो अब एक कॉलेज की प्राचार्या है, वो मूटा की उपाध्यक्षा थीं। विकास शर्मा अध्यक्ष थे। जिन्होंने सीसीएस यूनिवर्सिटी के इंग्लिश विभाग में प्रोफेसर होने के बाद इस्तीफा दे दिया, तब निवेदिता अध्यक्ष बनी, तो क्या निवेदिता को प्राचार्या बनने के बाद इस्तीफा नहीं दे देना चाहिए था, क्योंकि कोई भी प्राचार्य, प्राचार्य शिक्षक संघ का सदस्य या पदाधिकारी कैसे हो सकता है। इसके इतर वह शिक्षक संघ के एक गुट को मान्यता प्रदान कर रहीं हैं। क्या यह उनके इंटिग्रिटी पर सवाल खड़ा नहीं करता? जय कुमार सरोहा जो अब बड़ौत जाट कॉलेज के प्रिंसिपल हैं वो मूटा के भी सचिव हैं, क्या उन्हें प्राचार्य बनने के बाद पद से त्यागपत्र देकर सह सचिव को चार्ज नहीं दे देना चाहिए था? पर वो भी अपने पद पर कायम हैं। यही नहीं आगामी मूटा चुनाव में सरोहा चुनाव अधिकारी हैं।
कॉलेज के शिक्षकों का कहना है की कोई प्राचार्य शिक्षक संघ चुनाव का पदाधिकारी कैसे हो सकता है? कुछ शिक्षकों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि मूटा पदाधिकारियों की लापरवाही एवं पक्षपातपूर्ण रवैये का पता इससे भी चलता है की उनके द्वारा मान्यता दिए गए संघ के कार्यकारिणी के पांच में से तीन सदस्य अनिल गोविंदन, मूलचंद वर्मा एवं इनामुर रहमान उस गुट के नहीं अपितु दूसरे गुट के हैं। इस प्रकार का पक्षपात पूर्ण रवैया किसी को विशेष लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है, और वह इसकी घोर निंदा करतें हैं। उधर मूटा ने जिस गुट को मान्यता दी है और निर्वाचन प्रक्रिया को सही ठहराया है। वह गुट विरोधी गुट के सभी आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। हालांकि उन्होंने इन आरोपों के बावत अभी तक अपना कोई विस्तृत पक्ष नही रखा है। ऐसे में मूटा द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षक संघ गुट द्वारा जो भी पक्ष रखा जाएगा, उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।















