शिक्षा के मंदिर स्कूल में शिक्षक बना शैतान पढ़ाई के दौरान छात्राओं से करता था गंदी हरकत खुले में घूम रहा आरोपी

-परिजनों के विरोध के बाद शिक्षक हुआ निलंबित, शिक्षक की धमकी से स्कूल जाने से डर रही बच्चियां
-आखिरकार कब होगी शिक्षक पर एफआईआर या फिर किसी घटना का है प्रशासन को इंतजार

गाजियाबाद। किसी भी छात्र के उज्ज्वल भविष्य का रास्ता एक शिक्षक ही प्रशस्त करता है। हालांकि वही शिक्षक ही अगर छात्राओं के साथ गलत व्यवहार करने लगे तो उनके भविष्य का ऊंट किस करवट बैठेगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। एक तरफ सरकार परिषदीय स्कूलों की कायाकल्प बदलने के हरेक प्रयास कर रही है। वहीं स्कूलों में छात्राओं के साथ रहे इस तरह के मामलों से सर्व शिक्षा अभियान को शिक्षक पलीता लगाने का काम कर रहे है। स्कूल में अभिभावक अपने बच्चों को बड़ी उम्मीद के साथ भेजते है। जिनसे उनका जीवन सुधर जाए और वह भविष्य में कुछ कर सकें। लेकिन अब शायद स्कूलों में ही बच्चियों का जीवन खतरे में जाता नजर आ रहा है।

जब स्कूल की बच्चियां शिक्षा के मंदिर स्कूल में ही अपने आपकों को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही है तो बाहर कैसे वह अपने आपकों को सुरक्षित महसूस करेंगी। करीब एक माह पूर्व लखनऊ में एक शिक्षक द्वारा मासूम बच्ची के साथ किए गए गैंगरेप मामले में पुलिस ने आरोपी शिक्षक को जेल भेज दिया। वहीं कुछ दिन पूर्व गाजियाबाद के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक द्वारा किए गए छात्राओं से छेड़छाड़ मामले में विभाग ने सिर्फ खानापूर्ति करते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया। जबकि छात्राओं का बयान भी दर्ज किया गया, मगर उसके बाद भी कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। उक्त शिक्षक को दो साल पूर्व भी छात्राओं से छेड़छाड़ मामले में तबादला कर दिया गया था। अगर उस वक्त शिक्षा विभाग शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर देता तो शायद फिर से इस तरह की घटना घटित नहीं होती। लेकिन विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई न होने के कारण शिक्षक का हौसला इतना बढ़ गया कि छात्राओं को पढ़ाने की जगह उनसे गंदी बात और छेड़छाड़ करने पर उतारू हो गया। बताया जा रहा है कि शिक्षक इस तरह की हरकत पिछले काफी समय से कर रहा था, मगर छात्राओं ने समाज के डर से यह बात किसी को नहीं बताई, जब शिक्षक ने अपनी हंदे पार कर दी तो छात्राओं पूरी घटना परिजनों को बताई और उसके बाद शिक्षक की करतूत का खुलासा हुआ।

मुरादनगर ब्लॉक के एक गांव मनौली में उच्च प्राथमिक विद्यालय में राजू सैफी पिछले करीब 6 साल से सहायक अध्यापक के रुप में तैनात है। इससे पूर्व भदौली, हुसैनपुर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रुप में कार्यरत थे। हमारे समाज में शिक्षक को भगवान का दर्जा दिया गया है। मगर जब वहीं भगवान शैतान बनने लगे तो बच्चों का भविष्य किस तरह से सुरक्षित रहेगा। यह अपने आपमें एक सवाल है। इस तरह के मामलों में प्रशासन को भी अपनी तरफ से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, जिससे भविष्य में कोई भी शिक्षक इस तरह की हरकत न करें। परिजनों ने शिक्षक पर आरोप लगाया कि वह पढ़ाई के दौरान छात्राओं से अश्लील बातें भी करता था। जब कोई इसका विरोध करता तो उन्हें डरा-धमका कर चुप करा देता था। मगर हिम्मत कर एक छात्रा ने गत सोमवार को शिक्षक के खिलाफ आवाज उठाते हुए पूरा घटनाक्रम अपने परिवार को बताया। तब जाकर शिक्षक की करतूतों का खुलासा हुआ। इसकी जांच कराने के बाद मंगलवार को बीएसए ओपी यादव ने उसे निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए।
यह कार्रवाई तब की गई जब सोमवार को पीडि़त छात्राओं के अभिभावक स्कूल पहुंच गए। उन्होंने हंगामा करते हुए आरोपी शिक्षक की पिटाई कर दी। मौके पर पुलिस पहुंच गई थी। स्कूल के अन्य शिक्षकों ने अभिभावकों को आश्वासन दिया था कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ 24 घंटे में कार्रवाई हो जाएगी।

मगर विभागीय कार्रवाई सिर्फ निलंबित तक ही सीमित रह गई। परिजनों का कहना है कि आज भी शिक्षक खुले में घूम रहा है। अगर इस तरह का अपराधी खुले में घूमेगा तो बच्चियां कैसे सुरक्षित स्कूल जाएगी। शिक्षक की हरकतों की वजह से आज भी स्कूल की बच्चियां डर के कारण या तो घर बैठी हुई है या फिर डर-डरकर स्कूल जा रही है। उन्हें भी डर कहीं ऐसा न हो कि शिक्षक कहीं रास्ते में उन्हें फिर से धमकाने या फिर कुछ और न करने लगे। बच्चों के भविष्य के लिए विभाग को भी आगे बढ़कर शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना चाहिए। जिससे इस तरह के शिक्षक को एक सबक मिल सकें। परिषदीय स्कूलों की शिक्षा की व्यवस्था अब राम भरोसे ही है। कहीं स्कूलों में बच्चियां सुरक्षित नहीं है तो कहीं शिक्षक ही आपस में भिड़ रहे है। हाल ही लोनी क्षेत्र के एक स्कूल में शिक्षिका ने अपने हेड प्रिंसिपल से मारपीट की। जिस पर भी विभाग ने निलंबन की कार्रवाई करते हुए खानापूर्ति कर दी। देखा जाए तो परिषदीय स्कूलों में कहीं न कहीं इस तरह के मामलों को देखकर अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे है। जिस कारण दिन प्रतिदिन सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसे शिक्षकों की हरकतों से आज अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी से कार्य कर रहे लाखों की शिक्षकों की प्रतिष्ठा पर उंगली उठ रही है।