संभव जनसुनवाई में शिकायत लंबित मिली तो नगर आयुक्त का चढ़ा पारा, बाबू को लगाई फटकार और मौके पर हुआ निस्तारण

-24 संदर्भों पर सुनवाई, जलकल विभाग की सबसे ज्यादा आठ शिकायतें; निर्माण विभाग से सात मामले
-म्यूटेशन की शिकायत पर बाबू को फटकार, नगर आयुक्त ने उसी दिन समाधान और मॉनिटरिंग के दिए निर्देश
-अवैध डेयरियों के खिलाफ अभियान चलाने के आदेश, कागजी नहीं, मौके पर दिखना चाहिए शिकायत का समाधान

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम की ‘संभव’ जनसुनवाई में मंगलवार को शिकायत के समाधान में विभागीय स्तर पर हुई देरी को लेकर नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक का सख्त रुख सामने आया। जनसुनवाई के दौरान एक शिकायतकर्ता के दोबारा पहुंचने पर नगर आयुक्त ने संबंधित संपत्ति विभाग के बाबू को मौके पर बुलाकर कड़ी फटकार लगाई और शिकायत का तत्काल निस्तारण कराया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। ‘संभव’ जनसुनवाई के दौरान नगर निगम के विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 24 संदर्भ प्राप्त हुए। इनमें निर्माण विभाग के सात, उद्यान विभाग के दो, संपत्ति विभाग के दो, जलकल विभाग के आठ, प्रकाश विभाग का एक, टैक्स विभाग के दो तथा पशु चिकित्सा विभाग के दो संदर्भ शामिल रहे। नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को सभी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने और समाधान की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई के दौरान म्यूटेशन से संबंधित शिकायत लेकर शिकायतकर्ता सीमा मंगल दोबारा पहुंचीं। मामला लंबित होने की जानकारी मिलने पर नगर आयुक्त ने संबंधित संपत्ति विभाग के बाबू को मौके पर बुलाया।

शिकायत के समाधान में हुई देरी पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए बाबू को कड़े निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शिकायतों को लंबित रखना या समाधान के लिए लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और उनकी टीम ने मौके पर ही शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान कराया। नगर आयुक्त ने संबंधित विभागीय अधिकारी को मॉनिटरिंग व्यवस्था मजबूत करने और प्राप्त संदर्भों का यथासंभव उसी दिन निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य केवल शिकायत सुनना नहीं, बल्कि उसका प्रभावी और समयबद्ध समाधान कराना है। ‘संभव’ जनसुनवाई में प्राप्त 24 संदर्भों में सबसे अधिक आठ शिकायतें जलकल विभाग से संबंधित रहीं। इसके अलावा निर्माण विभाग से सात, उद्यान से दो, संपत्ति से दो, टैक्स से दो, पशु चिकित्सा से दो और प्रकाश विभाग से एक शिकायत प्राप्त हुई। नगर आयुक्त ने सभी विभागों के अधिकारियों को शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने विशेष रूप से शहर में अवैध रूप से संचालित डेयरियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान विभागीय स्तर पर संभव है, उनमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिकायतों के समाधान की केवल कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि मौके पर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करते हुए समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान करना है। अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि शिकायतकर्ता को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार नगर निगम कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।

उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान में लापरवाही अथवा अनावश्यक देरी करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रत्येक विभाग को प्राप्त संदर्भों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। जनसुनवाई के दौरान अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव, महाप्रबंधक जल कामाख्या प्रसाद, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, संपत्ति प्रभारी चंद्रकांता, प्रकाश विभाग से स्वप्निल जैन तथा निर्माण विभाग की टीम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए उनका तेजी से समाधान कराया जाए, ताकि आमजन का नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भरोसा और मजबूत हो।