-तंबाकू सेवन से कोई वास्ता नहीं रखने की अपील
गाजिय़ाबाद। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर भागीरथ सेवा संस्थान द्वारा संचालित कैमकुस ड्रग डी-एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर, गाजियाबाद ने एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार का विषय था, कोविड-19 के दौरान आइसोलेशन में तंबाकू प्रयोग एवं दैहिक-मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव। बता दें कि प्रत्येक वर्ष की 31 मई को पूरे विश्व मे तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। गूगल मीट पर इस वेबिनार का आयोजन किया गया। एसपी देहात डॉ (एमबीबीएस) इराज राजा (आईपीएस) ने वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। पैनल में मनोचिकित्सक डॉ स्वाति मित्तल ( एमडी, एमबीबीएस) और क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट जया सुकुल ने इस विषय पर विस्तार से अपना अपना पक्ष रखा। डॉ इराज राजा ने बताया कि कोविड-19 के दौरान सामान्यत: लोगों में तनाव बढ़ा है। ऐसे में कुछ लोग तनाव कम करने तंबाकू सेवन की तरफ बढ़ते हैं या फिर तंबाकू सेवन की मात्रा बढ़ा देते हैं जिसकी वजह से उनमें अन्य प्रकार की मानसिक और शारीरिक समस्याएं बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि तंबाकू निश्चित रूप से ड्रग्स लेने की पहली सीढ़ी है और ड्रग्स समाज के लिए कितना भयंकर हो सकता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। ड्रग्स लेने के बाद व्यक्ति कई ऐसे अपराध कारित कर देता है जिन्हें वह सामान्य स्थिति में करने की हिम्मत नहीं करता। उन्होंने आमजन एवं खासतौर पर युवा वर्ग से तंबाकू सेवन का हमेशा के लिए परित्याग करने का प्रण लेने की अपील की। मनोचिकित्सक डॉ स्वाति मित्तल ने बताया कि तंबाकू कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है, जैसे कि फेफड़े के रोग, ट्यूबरकुलोसिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) आदि। इससे फेफड़े का कैंसर और मुंह का कैंसर भी हो सकता है। शारीरिक बीमारियों के अलावा तम्बाकू कई मानसिक बीमारियों को जन्म देता है। तम्बाकू की जरा सी भी मात्रा स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक साबित होती है। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में आइसोलेशन के कारण कुछ लोगों ने तो तम्बाकू सेवन छोड़ दिया लेकिन ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है, जिन्होंने तम्बाकू का सेवन सामान्य दिनों की अपेक्षा बढ़ा दिया। क्लीनिक साइकोलोजिस्ट जया सुकुल ने तम्बाकू सेवन के शरीर और व्यवहार में होने वाले मनोवैज्ञानिक बदलावों पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि तम्बाकू से निकलने वाले केमिकल किस तरह ब्लड में मिलकर हमारे स्नायुतंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। भागीरथ सेवा संस्थान के निदेशक अमिताभ सुकुल ने सभी वक्ताओं एवं मुख्य अतिथि का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आइसोलेशन में रहने के कारण तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं लोगों में देखने को मिली। लेकिन इन समस्याओं का निराकरण योग एवं मेडिटेशन के द्वारा आसानी से किया जा सकता है। सर्वे में यह बात देखने को मिली की जिन लोगों ने आइसोलेशन के दौरान योग एवं मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया वह जल्दी रिकवर हुए और तनावमुक्त भी रहे। उन्होंने डब्ल्यूएचओ द्वारा बनाई गई तम्बाकू निषेध दिवस की इस वर्ष की थीम छोडऩे के लिए प्रतिबद्ध हैं का अनुकरण करने की सभी से अपील की।















