एक फोन कॉल में इतना वक्त क्यूं ?

गाजियाबाद। किसान आंदोलन पिछले 6 माह से ज़्यादा वक्त से जारी है। देश की राजधानी दिल्ली के गाज़ीपुर, सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर अन्नदाताओं ने अपना अस्थायी आशियाना बना लिया है। इस आंदोलन की शुरुआत में ऐसा लगा कि ये आंदोलन शायद ही लंबा खींच पाएगा, लेकिन ये अन्नदाताओं का फौलादी हौसला ही है कि चाहे हाड़ कंपाने वाली सर्दी हो या जानलेवा गर्मी वो टस से मस नहीं हुए। अपनी जगह पर अडिग हैं। इस आंदोलन को दिल्ली की सीमाओं से बाहर भी कई प्रदेशों में ले जाने में सफल हुए। आंदोलन के छह माह पूरे होने पर किसानों ने विरोध-प्रदर्शन किया और गिरफ्तारियां भी दीं। व्यापारी एकता समिति, इंदिरापुरम के संयोजक प्रदीप गुप्ता ने कहा अन्नदाताओं का ये आंदोलन तीन नए कृषि क़ानूनों के खिलाफ है। तीनों में सबसे प्रमुख मांग है एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून सरकार बनाए। सरकार इसके लिए भी तैयार नहीं है। ऐसा नहीं है कि किसानों और सरकार के बीच संवाद कम हुए हों, कम से कम सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की बातचीत हुई है, लेकिन इससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ, लेकिन बीते चार माह से सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कोई संवाद नहीं हुआ है। लिहाजा 21 मई को 40 किसान संगठनों के समूह संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी और तत्काल किसानों के साथ संवाद दोबारा शुरू करने की मांग की। हालांकि उसके बावजूद अभी तक बातचीत शुरू नहीं हो पाई है। संयोजक प्रदीप गुप्ता ने बताया कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का ये आंदोलन असल में सितंबर-2020 से ही पंजाब और हरियाणा में जारी था, लेकिन जब किसानों को लगा कि उनकी बात दिल्ली तक नहीं पहुंच पा रही है तो नवंबर के आखिर में किसान देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे। उन्हें लगा कि जिस दिल्ली में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सभी केंद्रीय मंत्री हैं, वहां तक बात पहुंचानी आसान होगी। लेकिन उनकी सोच ग़लत थी। 6 महीने से ज़्यादा वक्त बीतने के बावजूद कई दौर की बातचीत के बावजूद अन्नदाताओं को अपनी बात पहुंचाने में सफलता नहीं मिल पाई। बीते छह माह के अरसे में किसानों ने सडक़ों पर लगे तंबुओं और ट्रॉलियों को अपना घर बना लिया है। ये आजाद भारत का सबसे बड़ा और लंबा किसान आंदोलन है। किसान आंदोलन के 6 माह से ज्यादा वक्त बीतने के बावजूद इसका समाधान नहीं निकलना मोदी सरकार के किसान हितैषी होने के दावों पर बड़ा सवाल है। पीएम मोदी कहते हैं कि उनकी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है। लेकिन किसान आंदोलन का समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होने कहा केंद्र सरकार की कथनी और करनी में फर्क साफ दिखने लगा है। साफ है कि केंद्र सरकार अगर इच्छाशक्ति दिखाए तो किसानों का ये आंदोलन जल्द खत्म हो सकता है। पीएम मोदी ने कहा था कि किसान भाई हमसे सिर्फ एक कॉल की दूरी पर हैं। तो एक कॉल करने में उन्हें इतना वक्त क्यूं लग रहा है। ये समझ से परे है। दिल्ली की गाजीपुर, सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर 6 माह से ज़्यादा वक्त से किसानों ने अस्थायी आशियाना बना रखा है। इसके कारण हर दिन लाखों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बॉर्डर क्रॉस करने में काफी वक्त लगता है। समय के साथ साथ ईंधन की भी बर्बादी हो रही है। इसलिए भी सरकार को जल्द से जल्द किसानों के साथ बातचीत कर इस आंदोलन को समाप्त कराना चाहिए। इस आंदोलन के ख़त्म होने से रोजाना दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं से गुजरने वाले आम लोगों की मुसीबतें भी काफी कम हो जाएंगी।