Assam-Mizoram dispute – ठोस पहल की जरूरत

Assam-Mizoram dispute गहराना काफी चिंताजनक है। हिंसक घटना की गूंज देश-दुनिया में सुनाई दे रही है। दुनियाभर में इसका बेहद गलत संदेश गया है। इससे भारत की छवि को धक्का लगा है। सीमा विवाद में 2 राज्यों की पुलिस का आपस में टकरा जाना और अंधाधुंध गोलियां चलना किसी नजरिए से अच्छा कदम नहीं है। मामले को शांति पूर्ण तरीके से डील करने की कोशिश की जानी चाहिए थी। गोलीबारी में असम पुलिस के 5 जवानों की मौत हो गई। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी सोशल मीडिया पर जिस प्रकार से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बौछार करते रहे, ऐसा भी संभवत: पहले कभी देखने को नहीं मिला। फिलहाल मामला शांत हो चुका है, मगर दोनों तरफ तनाव कायम है।

असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद नया नहीं है बल्कि इस विवाद का निपटारा करने के लिए कभी सरकारी और राजनीतिक स्तर पर गंभीर प्रयास नहीं किए गए। नतीजा अब सबके सामने है। यह विवाद औपनिवेशिक काल से चला आ रहा है। मिजोरम के पृथक राज्य बनने के बावजूद इस प्रकरण को निपटाया नहीं जा सका है। मिजोरम पहले असम का हिस्सा रहा है। असम से अलग होने के बाद वह तेजी से प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ने को आतुर है। दोनों राज्यों की सीमा पर जिस प्रकार की हिंसा हुई, उसका अंदाजा पहले से किसी को नहीं था।

असम के CM Hemant Biswa Sarma और मिजोरम के CM Zoramthanga समय-समय पर सीमा विवाद को उठाते रहे हैं। असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है। सरकार के मुखिया हेमंत बिस्वा सरमा है। असम की जनता में उनकी अच्छी पकड़ है। मिजोरम में भी भाजपा के सहयोग से सरकार का संचालन हो रहा है। CM Zoramthanga की मिजो नेशनल फ्रंट भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है। इसके बावजूद दोनों राज्यों में इस कदर विवाद बढ़ना चिंता का कारण है। असम के सीएम ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में मिजोरम पुलिस के जवानों को जश्न मनाते दिखाया गया है। जिस पर हेमंत बिस्वा सरमा ने टिप्पणी की है कि यह बेहद भयावह है। दरअसल हिंसक संघर्ष में असम पुलिस के जवानों की मौत के बाद मिजोरम पुलिस के जवानों को खुशी जाहिर करते देखा गया था। सोशल मीडिया पर यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर यूजर्स की तरफ से भी मिश्रित प्रतिक्रिया मिल रही है।

हालांकि असम पुलिस के जवानों की मौत पर मिजोरम के सीएम ने माफी मांग ली है। उन्होंने हिंसक घटना पर अफसोस जाहिर किया है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब चंद दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में असम और मिजोरम के सीएम ने भी भाग लिया था। बैठक में निश्चित रूप से Assam-Mizoram dispute पर भी चर्चा हुई होगी। इस बीच विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। विपक्ष ने इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ असम-मिजोरम के सीमा विवाद को निपटाने में मोदी सरकार के प्रयासों पर सवाल उठाए हैं।

गृहमंत्री अमित शाह ने हिंसक संघर्ष के उपरांत असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों के साथ फोन पर बातचीत की है। गृह मंत्रालय की पूरी कोशिश मामले को पूरी तरह से शांत कराने की है। इसके मद्देनजर दोनों राज्यों के बॉर्डर के आस-पास भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। सरकारी तंत्र को आशंका है कि कहीं दोनों राज्यों के नागरिकों में मनमुटाव न बढ़ जाए। इससे शांति एवं कानून व्यवस्था को बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

Assam-Mizoram dispute से इतर देश के विभिन्न राज्यों में अक्सर सीमा विवाद देखने को मिला है, मगर आज तक ऐसे हालात कभी उत्पन्न नहीं हो पाए थे, जो आज असम-मिजोरम में देखने को मिले हैं। अब समय आ गया है कि इस विवाद का मिल-बैठकर शांतिपूर्ण ढंग से हल खोजा जाए। असम में भाजपा सरकार होने और मिजोरम में एनडीए समर्थक दल की सरकार होने से इस मसले का निदान करने में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। दोनों राज्यों को वार्ता की मेज पर आकर खुले दिमाग से बातचीत करनी चाहिए ताकि भविष्य में फिर ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हो सकें।

भारत का चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद जगजाहिर है। लद्दाख बॉर्डर पर जहां चीन आए दिन उकसावे की कार्रवाई कर रहा है, वहीं जम्मू-कश्मीर को कब्जाने के लिए पाकिस्तान कितने वर्षों से मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहा है। ऐसे में यदि भारत के 2 राज्यों के मध्य सीमा विवाद का निपटारा नहीं होगा तो दुश्मन देशों को अंगुली उठाने का सुनहरा अवसर मिल सकता है। उनके लिए यह कहना आसान होगा कि जो देश अपने भीतर सीमा विवाद को निपटा नहीं सकता, वह पड़ोसी देशों के साथ कैसे डील कर पाएगा?

यदि दोनों राज्यों में टकराव बढ़ता रहेगा तो इसका गलत संदेश जनता के बीच भी जाएगा। दोनों राज्यों के नागरिक एक-दूसरे को दुश्मन की नजर से देखेंगे। इससे देश की एकता, अखंडता और भाईचारे पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है। गृह मंत्रालय को Assam-Mizoram dispute का हल ढूंढ़ने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए। नागरिकों को भी आवेश में आने की बजाए सौहार्द पूर्ण माहौल बनाए रखना चाहिए। दोनों राज्यों की पुलिस को किन परिस्थितियों में एक-दूसरे पर गोलियां चलानी पड़ीं, इसकी गंभीरता से जांच किए जाने की जरूरत है। दोषी पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की आवश्यकता है। असम और मेघायल की सीमा पर भी तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। असमाजिक तत्व कहीं मौके का फायदा उठाने की कोशिश न करें, इसे ध्यान में रखकर असम-मेघालय सीमा पर सतर्कता बढ़ानी होगी।