शादी मंडप में दुल्हन बोली मैं दान की वस्तु नहीं, बिना कन्यादान के हुई शादी, वर और वधू पक्ष ने दी रजामंदी

नई दिल्ली। वक्त के साथ बेटियों की सोच काफी बदल रही है। अब वह खुलकर फैसले लेने में कतई संकोच नहीं करती हैं। यदि कोई पुरानी परंपरा उन्हें पसंद नहीं तो वह उसे अस्वीकार करने से भी नहीं हिचकती हैं। ताजा मामला युवा आईएएस तपस्या परिहार का है। तपस्या को शादी में कन्यादान की परंपरा पसंद नहीं है। अलबत्ता उन्होंने अपनी शादी में पिता से कन्यादान नहीं कराया। तपस्या के इस निर्णय को परिवार ने भी खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। वर पक्ष ने भी उनके विचारों का सम्मान किया है। आईएएस तपस्या परिहार अब सुर्खियों में आ गई हैं। आईएएस तपस्या का दो टूक जवाब है कि बेटी दान करने की चीज नहीं है। जनपद नरसिंहपुर में जन्मी आईएएस तपस्या परिहार ने शादी में कन्यादान की परंपरा को तोड़ दिया है। अपनी शादी में उन्होंने पिता से कन्यादान नहीं कराया। नरसिंहपुर के करेली के नजदीक छोटे से गांव जोबा की निवासी तपस्या परिहार 2018 बैच की आईएएस हैं। वह कन्यादान की परंपरा को सही नहीं मानती हैं। तपस्या का विवाह गत 12 दिसंबर को पंचमढ़ी में गर्वित गंगवार के हुआ है। गर्वित गंगवार आईएफएस हैं। अपने निर्णय के बारे में तपस्या का कहना है कि बचपन से उनके मन में समाज की इस विचारधारा को लेकर सवाल था। कैसे कोई मेरा कन्यादान कर सकता है, वह भी मेरी बगैर इच्छा के। इस विषय में उन्होंने अपने परिवार के साथ खुले मन से चर्चा की। परिजनों ने भी तपस्या के फैसले को स्वीकार लिया। दूसरी मुश्किल वर पक्ष को लेकर थी, मगर वर पक्ष भी बिना कन्यादान किए शादी की बात पर सहमत हो गया। आईएएस तपस्या का कहना है कि जब 2 परिवार आपस में मिलकर विवाह करते हैं तो फिर बड़ा-छोटा या ऊंचा-नीचा होना ठीक नहीं। क्यों किसी का दान किया जाए? तपस्या के पिता विश्वास परिहार ओशो भक्त हैं।

उन्होंने कहा कि बेटे और बेटी में कोई अंतर न हो। बेटियों को दान कर उनके हक और संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। कानून भी यही कोशिश करता है कि बेटे-बेटी को समान माना जाए। बेटियों के मामले में दान शब्द ही उन्हें अच्छा नहीं लगता। उधर, आईएएस तपस्या के पति गर्वित भी पत्नी के फैसले से संतुष्ट दिखे। उन्होंने कहा कि क्यों किसी लड़की को शादी के बाद पूरी तरह बदलना चाहिए। कन्यादान जैसी परंपराओं को धीरे-धीरे दूर करने का प्रयास करना चाहिए।