– ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग में आई कमी, शमशान घाट पर भी है बेहतर व्यवस्था
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है लेकिन हालात में सुधार हो रहा है। ऐसा महसूस भी हो रहा है और ऑक्सीजन आपूर्ति के रिकार्ड भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। पिछले सप्ताह तक अस्पताल में बेड और आॅक्सीजन सिलेंडर की मारामारी मची हुई थी वहीं अब अस्पतालों में बेड भी उपलब्ध है और ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग में भी भारी कमी आई है। शहर के हालात सुधारने में नगर निगम के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही वजह है कि शहरवासियों द्वारा भी गाजियाबाद नगर निगम की तारीफ की जा रही है। ऑक्सीजन सिलेंडर क्राइसिस से निपटने को लेकर गाजियाबाद नगर निगम द्वारा अपनाई गई व्यवस्था को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया गया और प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद नगर निगम मॉडल की भी तारीफ की। 
शहर में जब हालात बेकाबू हो गये थे। अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं होने की समस्या थी और ऑक्सीजन के अभाव में मरीज दम तोड़ रहे थे। उस समय गाजियाबाद नगर निगम के नगरायुक्त आईएएस महेंद्र सिंह तंवर को ऑक्सीजन का नोडल प्रभारी बनाया गया। महेंद्र सिंह तंवर ने अस्पतालों में आॅक्सीजन की मांग आपूर्ति का रियल टाइम डेटा तैयार कर जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की। आपातकाल में अचानक मांग बढ़ने पर इमरजेंसी स्टॉक और बैकअप प्लान भी रखा। होम आईसोलेशन में रह रहे लोगों को नगर निगम जोनल कार्यालय के माध्यम से ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराई गई।
उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह को इसका प्रभारी अधिकारी बनाया गया और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने सभी जोन में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। इन्ही की देख-रेख में आॅक्सीजन सिलेंडर का वितरण किया गया। इन तैयारियों का परिणाम रहा है कि अब हालात बेहद सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं।
नगर निगम द्वारा होम आईसोलेशन में रह रहे लोगों को 1500 से अधिक ऑक्सीजन के सिलेंडर पिछले 9 दिनों में उपलब्ध कराये गये हैं। 5 मई को जहां सर्वाधिक 238 ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग रही। 10 मई को मांग घटकर 140 के आस-पास पहुंच गया। 14 मई को सिर्फ 89 ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग होम आईसोलेशन के लिए हुई।
जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि हालात सुधर रहे हैं। अस्पतालों में बेड उपलब्धता की स्थिति में सुधार हुआ है। कई शिकायतें ऐसी थी कि प्राइवेट अस्पताल वाले बेड खाली होने के बावजूद मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं और अधिक रकम वसूल करके मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कर रहे हैं। नगरायुक्त ने पीपीई किट पहन कर अस्पतालों एवं उसके कोविड व आईसीयू वार्ड का निरीक्षण किया। शिकायत सही पाये जाने पर अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की। इसका भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिला। जानकारी के मुताबिक शहर के विभिन्न अस्पतालों अब 600 से अधिक बेड उपलब्ध है और आईसीयू व वेंटीलेटर बेड भी उपलब्ध हैं। मृतकों की संख्या अचानक काफी बढ़ जाने से शमशान घाट में भी अव्यवस्था हो गई और अंतिम संस्कार के लिए लोगों को कई घंटे लाइन में रहना पड़ता था।
नगरायुक्त ने अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार को इसका प्रभारी अधिकारी बनाया और शमाशान घाटों में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने हिंडन मोक्ष स्थली सहित अन्य श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार को लेकर जो व्यवस्था की उसका परिणाम काफी सार्थक रहा। हिंडन के अलावा नूरनगर में कोविड संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था उपलब्ध कराया गया। इंदिरापुरम, रजापुर, करहेड़ा, शालीमार गार्डन, छिजारसी शमशान घाट में लकड़ी उपलब्ध कराने से लेकर साफ सफाई और सैनेटाइजेशन पर भी जोर दिया गया जिससे कि संक्रमण के बढ़ने का खतरा ना रहे।
नगर निगम ने कोरोना संक्रमण की दुसरी लहर में आगे आकर जो व्यवस्थाएं संभाली है। वह काबिले तारिफ है। अब वह चाहें अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट की व्यवस्था हो या फिर आक्सीजन के साथ बेड की व्यवस्था। निगम ने अपनी जिम्मेदारी को बाखूबी अंजाम दिया। शहर की सफाई व्यवस्था के साथ सेनेटाइजेशन एवं फांगिग का कार्य भी लगातार जारी रहा। अब हालात भी सुधर रहे हैं। ऐसे में लोग गाजियाबाद नगर निगम की तारीफ कर रहे हैं।
















