मेडिकल क्षेत्र में देश बनेगा आत्मनिर्भर, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध होगा रोजगार

मेडिकल डिवाइस पार्क योजना पर तेजी से काम शुरू, 15 दिनों में तैयार होगा डीपीआर

उदय भूमि ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। मेडिकल क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रेटर नोएडा में रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा मेडिकल डिवाइस पार्क योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है और इसे 15 दिन में तैयार कर लिया जाएगा। अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी डीपीआर तैयार कर रही है। डीपीआर की जांच के बाद अगले महीने केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा। प्राधिकरण की योजना है कि मेडिकल डिवाइस पार्क को फेज वाइज डेवलप किया जाये और पहले फेज में 100 एकड़ की योजना लाई है। मेडिकल डिवाइस पार्क बन जाने के बाद ग्रेटर नोएडा का यमुना प्राधिकरण क्षेत्र देश में मेडिकल डिवाइस मैन्यूफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित होगा।medical-device16 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने अपने राज्यों में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित करने का केंद्र सरकार को भेजा गया था। जिनमें से कुछ प्रस्तावों को ही स्वीकृति मिली। जिसमें यमुना प्राधिकरण का प्रस्ताव शामिल है। पिछले महीने केंद्र सरकार ने यमुना प्राधिकरण के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति देने के बाद डीपीआर जमा कराने को कहा था। मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए पहले कलाम इंटिट्यूट हैदराबाद से डीपीआर बनवाई गई थी, लेकिन अब दोबारा अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी से इसकी डीपीआर बनवाई जा रही है। अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी द्वारा 15 दिनों में डीपीआर यमुना प्राधिकरण को सौंप दी जाएगी। इसके बाद इसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा और डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद योजना पर आगे तेजी से काम होगा। लगभग 300 एकड़ में विकसित होने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क में 1000 वर्ग मीटर से 10 हजार वर्ग मीटर तक के भूखंड होंगे। यहां पर बड़ी बड़ी कंपनियां मेडिकल डिवाइस और इंस्ट्रूमेंट मैन्यूफैक्चरिंग का काम करेंगी। इससेमेडिकल उपकरण बनाने के क्षेत्र में देश आत्मनिर्भर बनेगा। यहां बनने वाले मेडिकल उपकरण का विदेशों में भी निर्यात होगा। बुधवार को डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स की सचिव एस अपर्णा ने इसको लेकर बैठक की। बैठक में यमुना प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में योजना को लेकर कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।

1500 करोड़ रुपये का होगा निवेश
मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के जरिये उत्तर प्रदेश में 15000 करोड़ रुपये का निवोश होगा और लाखों की संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सेक्टर-28 में बनने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क मैन्यूफैक्चरिंग हब बनेगा। मेडिकल डिवाइस पार्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ-साथ लोकेशन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जेवर में बनने जा रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से मेडिकल डिवाइस पार्क की दूरी महज 3 किलोमीटर होगी। मेडिकल डिवाइस पार्क दादरी ड्राइपोर्ट से भी जुड़ा रहेगा। मेडिकल डिवाइस पार्क में 0.25 एकड़, 0.50 एकड़ व 1 एकड़ के भूखंड होंगे।

मेडिकल उपकरणों की लागत में आएगी कमी
मेडिकल डिवाइस पार्क में उपकरण के निर्माण की लागत भी कम आयेगी। जिससे देश में मेडिकल उपकरण सस्ते मिलेंगे। मेडिकल डिवाइस पार्क स्थापित होने से निकट भविष्य में यहां पर उत्पादित उपकरणों को विदेशों में भी निर्यात किया जाएगा। इससे देश की इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। एक सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 46 मेडिकल कॉलेज हैं तथा 130 फार्मास्युटिकल कॉलेज हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क में आने वाली कंपनियों को केंद्र और राज्य सरकार कई तरह की सब्सिडी देंगे। इसमें 10 वर्षों तक जीएसटी में भी छूट भी मिलेगी।

Arunveer Singh, ceo
डॉ. अरुणवीर सिंह,
मुख्य कार्यपालक अधिकारी , यमुना प्राधिकरण

मेडिकल डिवाइस पार्क को अलग-अलग फेज में डेवलप किया जाएगा। प्रथम फेज में 100 एकड़ में योजना लाई जाएगी। इसमें 1000 वर्ग मीटर से 10 हजार वर्ग मीटर तक के भूखंड शामिल होंगे। इसमें फ्लैटेड फैक्ट्री भी शाामिल हैं। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके लिए योजना निकाली जाएगी। पात्रता रखने वाली कंपनियों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे। योजना का डीपीआर 15 दिनों में तैयार हो जाएगा। मेडिकल डिवाइस पार्क डेवलप होने से निवेश बढ़ेगा। रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का आर्थिक विकास तेजी से होगा।

डॉ. अरूणवीर सिंह
सीईओ
यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण