देश की राजधानी में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में प्रयासरत केजरीवाल सरकार
नई दिल्ली। देश की राजधानी में शिक्षा की गुणवत्ता मेें सुधार लाने के लिए केजरीवाल सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं। सरकारी स्कूलों की हालत में बेहतर सुधार आया है। सरकारी स्कूल अब निजी स्कूलों को टक्कर देते दिखाई दे रहे हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को श्रेय मिल रहा है। सीएम और डिप्टी सीएम ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में भरसक कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में अब दिल्ली में सभी बच्चों को क्वॉलिटी एजुकेशन मिल सके, इसके लिए केजरीवाल सरकार प्रयासरत है।
केजरीवाल सरकार का विजन
डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया का कहना है कि केजरीवाल सरकार का विजन है कि सभी बच्चों को क्वॉलिटी एजुकेशन मिले और जब हर बच्चे को क्वॉलिटी एजुकेशन मिलेगी तभी हम भारत को विकसित देश बना पाएंगे। उनका कहना है कि आजादी के बाद से अब तक कई जगह तो ये एजुकेशन मॉडल तैयार किया गया है, जहां कुछ बच्चों को बेहतरीन शिक्षा मिल रही है, मगर अब तक ये सुनिश्चित नहीं किया जा सका है कि सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल पाए। अब जरूरत है कि शिक्षा का एक न्यूनतम बेंचमार्क तैयार किया जाए ताकि प्रत्येक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल सके। डिप्टी सीएम का कहना है कि केजरीवाल सरकार अपनी शिक्षा क्रांति 2.0 के तहत कार्य कर रही है और यह प्रयास किए जाएंगे कि प्रत्येक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल सके।
शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव
डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का कहना है कि दिल्ली में पिछले 5 साल के दौरान शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। सीएम अरविंद केजरीवाल के विजन के अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में काम किया जा रहा है। उनका मानना है कि देश में आज प्रत्येक बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। कुछ बच्चों को तो बेहतर शिक्षा मिल पा रही है, मगर बहुत से बच्चों को ऐसी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। उनका इस बात पर जोर है कि हमें यह सुनिश्चित करना है कि देश में शत-प्रतिशत बच्चों को क्वॉलिटी एजुकेशन मिले।
ऑनलाइन शिक्षा विकल्प नहीं
दिल्ली के डिप्टी सीएम एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि क्लास रूम टीचिंग का कोई विकल्प नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा इसका विकल्प नहीं हो सकती। यदि ऐसा होता तो उच्च विकसित देशों में अब तक सभी स्कूल बंद हो चुके होते। यह शिक्षण संस्थान तकनीकी रूप से सबसे ज्यादा सशक्त हैं और अपने सभी बच्चों को तकनीकी सिस्टम उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। उनका कहना है कि यह शिक्षा को बेहतर बनाने में उपयोगी जरूरी हो सकता है, मगर यह पारंपरिक शिक्षा का कभी विकल्प नहीं हो सकता है। शिक्षा मंत्री सिसोदिया का कहना है कि बच्चों को गूगल जैसे प्लेटफोर्म का उपयोग सीखने के लिए देना चाहिए। इसके कारण बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। बच्चों की शिक्षा बेहतर बनाने को शिक्षकों को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित करने की जरूरत है। इसके लिए तकनीकी का उचित तरीके से प्रयोग किया जा सकता है।
















