लक्ष्मी अकेले ही कई एनजीओ से बड़ी: संजीव जिंदल
अश्वनी शर्मा, उदय भूमि ब्यूरो।
बरेली। बेटी बोझ बहुत होती है यह जग सारा कहता है, बेटी के कदमों से सबके सारे बोझ दूर हो जाएंगे। कुछ ऐसी ही सोच अमूमन मां-बाप रखते ही हैं। इससे इतर, सच यह भी है कि बेटी मां-बाप के लिए बोझ नहीं, बल्कि मां-बाप के जीवन में बेटी के कदमों की आहट से बोझ दूर हो जाते हैं। समाज में एक ऐसी भी बेटी है, जिसने बेटी शब्द की नई परिभाषा गढ़, मां-बाप और समाज को नई सोच दे रही है। जिसने छोटी सी उम्र में शिक्षा की अलख जगाकर शिक्षा को नया आयाम दे रही है। कहते हैं कि बेटी घर की लक्ष्मी होती है। लेकिन वह सरस्वती भी होती है, अक्सर हम भूल जाते हैं। जब यह बिटिया पैदा हुई तो घर वालों ने सोचा घर में लक्ष्मी आई है तो नाम रखा लक्ष्मी। लेकिन उन्हें नहीं मालूम था कि उनके घर सरस्वती ने जन्म लिया है। लक्ष्मी अकेले ही कई एनजीओ कई क्लबों से बड़ी हैं।
साइकिल बाबा के नाम से मशहूर संजीव जिंदल ने आखिरकार समाज से सरस्वती को ढूंढ ही निकाला। उन्हें लक्ष्मी के घर का पता मालूम नहीं था। बस उड़ते उड़ते खबर मिली थी कि पिपरिया गांव में एक लक्ष्मी नाम की बच्ची जो खुद नाइंथ क्लास में पढ़ती है। वह पूरे गांव के फर्स्ट क्लास से लेकर 8 क्लास तक के 100 बच्चों को मुफ्त में पढ़ाती है। फिर क्या था पहुंच गये सुबह साइकिलिंग करते हुए लोगों से पूछते हुए लक्ष्मी के घर। किराए का एक कमरे का घर। पिता ट्रक ड्राइवर। बताते हैं कि जब सुबह लक्ष्मी के घर पहुंचे तो लक्ष्मी घर की सफाई के बाद अपनी मां के साथ खाना बना रही थी। मैंने उसे बताया बेटा मैं तुम्हारी क्लास देखने आया हूं।क्या आज क्लास नहीं है।
लक्ष्मी बोली बाबा अभी लगाती हूं क्लास। लक्ष्मी ने गांव का एक चक्कर लगाया और देखकर आश्चर्यचकित रह गया। बच्चे अपना अपना बैग लेकर लाइन से लक्ष्मी के घर की तरफ चल दिए और शुरू हो गई लक्ष्मी की क्लास। गांव के बच्चों के पास मोबाइल नहीं है और सरकारी टीचर मोबाइल पर सिलेबस भेज कर अपना काम पूरा कर देते हैं। लक्ष्मी अपने पिताजी के टूटे-फूटे मोबाइल पर वही सिलेबस देखकर बच्चों को पढ़ाती है। एक सादा कीपैड वाला फोन। सब कुछ देख कर उन्हें अपने आप और अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था।
संजीव जिंदल कहते हैं कि ज्यादा कुछ तो मैं भी नहीं कर सकता, पर मैं अपने बच्चों के साथ मिलकर इस बच्ची को एक मोबाइल फोन जरूर दिलवा दूंगा। ताकि वह ढंग से सिलेबस देखकर बच्चों को अच्छी तरह पढ़ा सकें। कहते हैं कि बिटिया लक्ष्मी के चरणों में साइकल बाबा नतमस्तक है।















