मफलरमैन का दिल्ली निकाला, आप-दा गई, मोदी की गांरटी पर भरोसा

विजय मिश्रा
(लेखक उदय भूमि के ब्यूरो चीफ हैं। इंडियन एक्सप्रेस, जी न्यूज, दैनिक जागरण, अमर उजाला, नई दुनिया सहित कई प्रमुख समाचार पत्र एवं न्यूज चैनल के साथ काम कर चुके हैं।)

त्वरित टिप्पणी

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे वाकई अप्रत्याशित कहे जाएंगे। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के अरमानों पर मतदाताओं ने अबकी बार झाड़ू फेर डाली है। पिछले लगभग बारह साल तक देश की राजधानी पर राज करने के बाद आप का विजय रथ आखिरकार रूक गया है। सत्ता में पुनः: वापसी की उम्मीदें धूमिल होने से आप संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जोर का झटका लगा है। इसके इतर सबसे ज्यादा दुर्गति कांग्रेस की हुई है। कांग्रेस की हालत दलदल में फंसे उस व्यक्ति की तरह हो गई है, जो बाहर निकलने की जितनी कोशिश करता है, उतना नीचे धंसता चला जाता है। दिल्ली में कांग्रेस की दुर्गति के लिए आम आदमी पार्टी (आप) को जिम्मेदार माना जाता है। चूंकि आप का उदय होने से सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा है। दरअसल 1998 से 2013 तक दिल्ली में कांग्रेस ने शासन किया। पंद्रह साल तक निरंतर कांग्रेस की सरकार दिल्ली में रही, मगर आप के आने के बाद कांग्रेस की हालत खराब होती चली गई। फिलहाल दिल्ली में भाजपा का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जाना चाहिए। 2014 के बाद से देशभर में मोदी मैजिक चल रहा है।

दिल्ली की सत्ता में लौटने का भाजपा का इंतजार समाप्त हो गया है। निश्चित रूप से दिल्ली की जनता ने पीएम मोदी के प्रति अपना भरोसा जताकर आप को सत्ता से बेदखल करने का निर्णय लिया है। दिल्ली में चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों में तीखी जुबानी जंग देखने को मिली थी। इस बीच आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऐसे भी आरोप लगा दिए थे, जिनमें कोई सच्चाई नहीं थी। यमुना नदी के पानी को जहरीला करने की साजिश रचे जाने का आरोप केजरीवाल ने लगाया था। हालांकि यमुना को स्वच्छ बनाने के मकसद में आप सरकार पूरी तरह नाकाम रही। जानकारों का मानना है कि दिल्ली में शराब घोटाले में फंसने और जेल जाने के कारण भी केजरीवाल की विश्वसनीयता और साख में काफी गिरावट आई। जेल से पैरोल पर रिहाई के बाद उन्होंने सीएम पद का मोह तो त्याग दिया था, मगर चुनाव जीतकर दोबारा सीएम बनने की बात कहकर अपनी महत्वाकांक्षाओं को उजागर भी किया। ऐसे में जनता के बीच यह संदेश गया कि केजरीवाल को कुर्सी का मोह है। आम आदमी पार्टी (आप) के अधिकांश दिग्गज वर्तमान में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। मनीष सिसोदिया से लेकर सत्येंद्र जैन तक के कारनामे जनता के सामने आ चुके हैं।

जानकारों का मानना है कि दिल्ली में हार से अरविंद केजरीवाल के सियासी कद को बड़ा नुकसान होगा। इंडिया गठबंधन में भी केजरीवाल की पूछ कम होने की संभावना बढ़ गई है। दिल्ली चुनाव परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि देश में मोदी मैजिक कम नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश के बाद दिल्ली ऐसा राज्य है, जहां लंबे समय के बाद सत्ता में भाजपा की वापसी की राह खुल पाई है। कांग्रेस के दिग्गजों को अब आत्मचिंतन कर संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। अन्यथा कांग्रेस की नाव यूं ही डूबती रहेगी। कुल मिलाकर शीश महल वाले मफलरमैन को जनता ने दिल्ली से बाहर कर दिया है। दिल्ली की सत्ता में वापसी से 27 साल बाद भाजपा का वनवास खत्म हो गया है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे दिग्गजों की हार ने आम आदमी पार्टी के बुरे दिनों की शुरुआत होने का संकेत दे दिया है। राजनीति में आप का आगमन किसी करिश्मे से कम नहीं था। नए अंदाज में राजनीति में एंट्री कर अरविंद केजरीवाल ने सभी को चौंका दिया था।