उदय भूमि
गाजियाबाद। व्यापारी एकता समिति संस्थान ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे व्यापार और उपभोक्ताओं के लिए उधारी लागत को कम करने वाला, विकासोन्मुखी कदम बताया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025 के लिए महंगाई दर 4.8 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 के लिए 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे आर्थिक विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन सुनिश्चित होगा। संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता के मुताबिक होम और बिजनेस लोन की ईएमआई कम होने से लोगों को वित्तीय राहत मिलेगी, उनकी खर्च योग्य आय (डिस्पोजेबल इनकम) बढ़ेगी और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी।
इसके परिणामस्वरूप, बाजार में पूंजी प्रवाह (लिक्विडिटी) बढ़ेगा, जिससे व्यावसायिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। मतलब साफ है कि इसका फायदा रियल एस्टेट सेक्टर को भी मिलेगा। एक ओर जिन ग्राहकों का ईएमआई चल रहा है उन्हें भी लाभ मिलेगा। वहीं दूसरी ओर होम लोन पर ब्याज दर कम होने से नए ग्राहक भी आकर्षित होंगे। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि आगामी बजट में आयकर छूट की सीमा 12 लाख तक बढ़ाई जाने की घोषणा से आम जनता की बचत में वृद्धि होगी। यह अतिरिक्त बचत उपभोक्ता खर्च, बाजार में मांग और तरलता को बढ़ाएगी, जिससे आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी और बाजार में उछाल आने की संभावना बनेगी।
रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करके इसे 6.25 प्रतिशत करना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम है, खासकर रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए। पॉलिसी रेट में इस बदलाव से उधार लेने की लागत कम होने की उम्मीद है, जिससे डेवलपर्स और घर खरीदने वाले दोनों को लाभ होगा। डेवलपर्स को कम उधार दरों के माध्यम से वित्तीय राहत मिलेगी, जिससे परियोजना निष्पादन में आसानी होगी और निर्माण लागत को प्रबंधनीय बनाए रखा जा सकेगा। घर खरीदने वालों के लिए, रेपो दर में यह कमी घर के लोन की ईएमआई में कमी लाएगी, जिससे घर खरीदना आसान हो जाएगा।
















