– पॉलिटिकल ट्रेनिंग सेंटर की जमीन से अवैध कब्जा हटाने का कांग्रेस, सपा और बसपा ने किया विरोध
– डेढ़ दर्जन से अधिक पार्षदों ने म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर को सौंपा ज्ञापन
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। पॉलिटिकल ट्रेनिंग सेंटरन की जमीन से अवैध कब्जा हटाये जाने के विरोध में विपक्षी पार्षद लामबंद हो रहे हैं। विपक्षी पार्षदों के एक प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को कार्रवाई रोकने और अब तक की कार्रवाई से प्रभावित लोगों को मकान देने की मांग से संबंधित ज्ञापन म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर को सौंपा। म्युनिसिपल कमिश्नर ने पार्षदों से कहा कि पॉलिटिकल ट्रेनिंग सेंटर शासन की प्राथमिकता की योजना है और सरकारी जमीन पर किसी को कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। जहां तक प्रभावित लोगों का सवाल है तो नगर निगम संवेदनशीलता दिखाते हुए नियमानुसार मकान दिलाएगा। पीड़ित परिवार अस्थाई रूप से काशीराम आवासीय योजना में रह सकते हैं।
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नंदग्राम में शांतिनगर और लोहिया विहार में पॉलिटिकल ट्रेनिंग सेंटर बनेगा। एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका शिलान्यास किया था। लेकिन इन जमीन भू-माफिया ने प्लाटिंग कर दी। कुछ लोग भू-माफियाओं के हाथों ठगे गये वहीं कई लोगों ने कम कीमत के लालच में जमीन खरीद ली। सरकारी जमीन पर कब्जा होने के कारण पॉलिटिकल ट्रेनिंग सेंटर का काम शुरू नहीं हो पा रहा था। प्रोजेक्ट में देरी की वजह से करोड़ों का नुकसान भी हुआ है। पॉलिटिकल ट्रेनिंग सेंटर गाजियाबाद को नई पहचान देगा और इससे शहर के विकास में भी मदद मिलेगी।
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नगर निगम ने पॉलिटिकल ट्रेनिंग सेंटर की जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए अब तक दो बार अभियान चलाया और दो दर्जन से अधिक मकानों को तोड़ कर जमीन का कब्जा वापस लिया गया। अभी भी यहां काफी संख्या में मकान सरकारी जमीन पर बने हैं जिसे तोड़ा जाएगा। इसका कांग्रेस, सपा और बसपा के पार्षद विरोध कर रहे हैं। सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में भारतीय कृषक समाज के जिलाध्यक्ष एवं कांग्रेस पार्षद मनोज चौधरी, कांग्रेस पार्षद दल के नेता जाकिर अली सैफी, कांग्रेसी पार्षद माया देवी, बसपा पार्षद दल के नेता आनंद चौधरी, सपा पार्षद दल के नेता मोहम्मद कल्लन, पार्षद पति चेतन यादव, पार्षद नरेश जाटव, विनोद, प्रवीण गुर्जर, पार्षद एवं जीडीए बोर्ड मेंबर आसिफ चौधरी, आनंद गौतम, रोहित त्यागी सहित 20 से ज्यादा पार्षद एकत्रित हुए। पार्षदों ने नगर निगम के कार्रवाई की निंदा की और कहा कि नगर निगम का उद्देश्य गरीबों को उजाड़ना नहीं है। गरीब परिवारों के मकान तोड़े दिये गये। जबकि बिल्डरों के प्रति नगर निगम सॉफ्ट है। शहर में बड़े बिल्डरों ने करोड़ों रुपए की एलएमसी की जमीन के बदले अभी तक निगम को जमीन नहीं दी गई। इन बिल्डरों पर निगम कार्रवाई करें। पार्षदों ने नगर निगम बोर्ड बैठक और कार्यकारिणी बैठक में फैसला होने तक शांतिनगर और लोहिया विहार में नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने की मांग की। म्युनिसिपल कमिश्नर ने कहा कि नगर निगम संवेदनशील संस्था है। लेकिन सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर आंखें नहीं मूंद सकता। मानवीय दृष्टिकोण रहेगा लेकिन सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराया जाएगा। जिन लोगों के मकान टूटे हैं उन्हें कांशीराम आवास योजना में फ्लैट रहने के लिए दिये जा रहे हैं। नगर निगम के अधिकारी लोगों को सरकारी मकान दिलाने के साथ-साथ भू-माफिया के खिलाफ कानूनी लड़ाई में भी मदद करेंगे।
















