राजमाता विजया राजे सिंधिया की गोद में खेली सपना बंसल गुजरे वक्त को याद कर हुई भावुक
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सपना बंसल को राजमाता विजया राजे सिंधिया की गोद में खेलने का अवसर मिला। गुजरे वक्त को याद कर वह आज भी भावुक हो जाती हैं। डॉ. बसंल ने विचारों और सिद्धांतों के प्रति आजीवन अडिग रहने वाली सरलता, सहजता और संवेदना की त्रिवेणी राजमाता विजया राजे सिंधिया की जयंती पर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि राजमाता सिंधिया ने उन्हें गोदी में खिलाया था। उन्हें देख-देख कर वह पली-बढ़ी हैं। राजमाता विजया राजे सिंधिया के विचारों का वह आज भी सम्मान करती हैं। प्रोफेसर सपना बंसल ने बताया राजमाता सिंधिया जी ने अपने त्याग और राष्ट्रभक्ति से देश की राजनीति को नयी दिशा प्रदान की। राष्ट्र व विचारधारा के प्रति उनका समर्पण वंदनीय था। आपातकाल के समय लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्होंने अत्याचारी शासन की घोर यातनाएं सही। विजयाराजे सिंधिया ग्वालियर राजघराने की राजमाता होने के साथ-साथ भाजपा की संस्थापक सदस्यों में से एक रही हैं। वह पांच बार लोकसभा और एक राज्यसभा की सदस्य निर्वाचित हुई थीं। सोमवार को उनकी 100वीं जयंती है। राजमाता सिंधिया ने राजसी जीवन त्याग कर संपूर्ण जीवन आम जन की सेवा में लगा दिया। त्याग व समर्पण की प्रतिमूर्ति रहा उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
















