लेखिका – नीति तोमर
वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ
(लेखिका वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ हैं। वनस्पति विज्ञान पर कई रिसर्च किया है। कई प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में वनस्पति विज्ञान एवं महिलाओं से जुड़ी विषयों पर लेख लिखती हैं। )
मौजूदा परिवेश में सभी आयु वर्ग के नागरिकों की जीवनशैली में परिवर्तन आया है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। विभिन्न प्रकार के सर्वसुलभ पौधों के बारे में जानना भी जरूरी है, जो औषधीय महत्व के साथ-साथ हमारे आस-पास के वातावरण को शुद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें आसानी से घर में उगाया जा सकता है। “नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे आॅफ इंडिय़ा” के अनुसार शहरीकरण, अधिक जनसंख्या, खराब जीवनशैली, तनाव, गलत खान-पान हमें मानसिक व शारीरिक रोगों की ओर अग्रसर कर रहा है। कोविड-19 (कोरोना वायरस) महामारी ने हमें पुन: प्रकृति से जुड़ने का महत्व बताया है। शरीर को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार हुआ है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाला देश इन जड़ी-बूटियों की बदौलत रोगों की रोकथाम करने में सक्षम हो सका है। महामारी के दौरान मानसिक तनाव से उबरने और शारीरिक सक्रियता बनाये रखने में शहरी लोग वापस बागवानी के प्रति ज्यादा जागरूक हो गए हैैं। प्रकृति से जुड़ना आज समय की जरूरत बन चुकी है। आज सबसे पहले एलोवेरा पौधे के बारे में बतायेंगे जिसे इसकी खूबियों के कारण “वंडर प्लांट” भी कहा जाता है।
यह सालभर हरा-भरा रहने वाला बहुत कम रख-रखाव मांगने वाला पौधा है। इसे कम पानी, अप्रत्यक्ष धूप की जरूरत होती है, जिससे यह छोटी सी जगह बालकनी या घर के अंदर भी रखा जाता है। भारत में औषधीय पौधों की कोई कमी नहीं है। इनके बारे में सटीक जानकारी होने और उपयोग करने से काफी फायदा मिलता है। प्रकृति प्रेमी अक्सर औषधीय पौधों को बढ़ावा देते हैं। यह पौधे पर्यावरण को हरा-भरा करने के साथ-साथ शरीर के लिए बेहद बेहतर होते हैं। तुलसी का पौधा भी इसमें शामिल है। तुलसी,ऐलोवेरा के अलावा, गिलोय,अश्वगंधा, आंवला आदि के पौधे भी औषधि के तौर पर काम आते हैं। औषधीय पौधों की उपयोगिता को प्रत्येक नागरिक को समझना होगा। विभिन्न रोगों को दूर करने में इन पौधों का कोई सानी नहीं है। धरा को हरा-भरा बनाने के लिए नागरिकों को निरंतर सहयोग करना होगा। पर्यावरण संतुलन के लिए पौधारोपण जरूरी है। प्रत्येक नागरिक को पौधे लगाकर उनकी समुचित देखभाल करनी चाहिए। घरों में औषधीय पौधे भी लगाए जाएंगे तो अच्छा होगा।
ऐलोवेरा में मौजूद जैविक तत्व
ऐलोवेरा में 75 जैविक तत्व होते हैं। इसमें विटामिन ए (बीटाकेरोटिन), विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन बी-12, एन्जाइम, मिनरल्स, शुगर, लिग्निन, सेपोनिन, सेलिसिलिक एसिड, अमीनो एसिड, एंटी-आॅक्सीडेंट्स, जैविक एसिड, कोलीन आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।
गुणों की खान है एलोवेरा
ऐलोवेरा औषधीय गुणों की खान है। इसी कारण विभिन्न रूप से उपयोगी है। जैसे भोज्य पदार्थों में इसें एफडीए द्वारा प्रमाणित और स्वीकृत किया गया है। विभिन्न कॉस्मेटिक्स, फूड सप्लीमेंट और हर्बल उपचार में एलोवेरा का उपयोग होता है। ऐलोय जेल दांतों की कैविटी में पाये जाने वाले बैक्टीरिया को मारकर दांतों को सुरक्षित करता है। ऐलोवेरा कब्ज में उपयोगी, जिसे जर्मनी की हर्बल एजेंसी ने सत्यापित किया है। डायबिटीज की वजह से उत्पन्न पैर के अल्सर को ठीक करता है।
-साउथ कोरिया में फाइटोथेरेपी में उपयोग होता है। यह यूवी किरणों से बचाकर स्किन की ऐजिंग क्रिया को रोकता है, जिससे त्वचा अधिक समय तक मुलायम और युवा रहती है।
-इसके फूल और पत्तियों में एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जिससे त्वचा के घाव दूर होते हैं।
-यह एक अच्छा एंटीआॅक्सीडेंट होने की वजह से जलने-कटने, स्किन एलर्जी, रूमेटाइड आॅर्थराइटिस, रूहमेटिक फीवर, डायरिया में बहुत उपयोगी है।
ऐलोवेरा में प्रोटियोलिटिक एंजाइम होने से यह हेयर फॉलिकिल की संख्या बढ़ाकर हेयर ग्रोथ को बढ़ाता है।
इसमें ‘ऐलोइन’ नामक स्किन लाइटनिंग, डीपिगमेंटिन कंपाउंड होता है, जिससे इसे विभिन्न कॉस्मेटिक क्रीम में हाइपर पिगमेंटेशन ट्रीटमेंट में प्रयोग किया जाता है।
एंटीएनथेलमिनटिक गुण की वजह से डायजेस्टिव ट्रेक्ट वार्म को दूर करता है।
-एलोवेरा रात में आॅक्सीजन उत्पन्न करता है। बदले में कार्बन डाइआॅक्साइड को शोषित करता है, जिससे घर की वायु शुद्ध होती है और प्रदूषण दूर होता है। इसलिए घरों में इसे एअर प्यूरिफायर के रूप में उगाया जाता है।
उपर्युक्त गुणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ऐलोवेरा पौधा औषधीय गुणों की खान है और हर घर में उगाने के योग्य है।
















