– विजय नगर जोन में निर्माण के दूसरे दिन ही टूट गई नाले की बाउंड्री
– सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं भ्रष्टाचार को लेकर तरह-तरह के कॉमेंट
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। दीवार भ्रष्टाचार की रेत से बनी थी। इसलिए ढ़ह गई। बेचारे इंजीनियर और ठेकेदार क्या करेंगे। लगता है नदी से निकलने वाले रेत में गड़बड़ी है। इंजीनियर को सिर्फ साइन करके कमीशन लेने से मतलब है। चलो शुक्र है दो दिन में दीवार टूट गई। यदि एक महीने बाद टूटती तो इंजीनियर और ठेकेदार को एक बार और भ्रष्टाचार करने का मौका मिल जाता। नगर निगम के दीवार टूटने की फोटो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इस तरह के कॉमेंट लिखकर नगर निगम के भ्रष्टाचार पर निशाना साध रहे हैं। लोगों की इस कड़ी प्रतिक्रिया की जायज वजह भी है। दरअसल नगर निगम ने नाले की जो दीवार बनाई वह दो दिनों में ही टूट गई। दीवार टूटने को लेकर भले ही अब कोई कारण बता दिया जाये फिर भी निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते है। इस तरह की घटनाओं से नगर निगम की साख भी खराब हो रही है।
मेयर और नगरायुक्त की हिदायत के बावजूद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। अब प्रताप विहार में नवनिर्मित नाला अचानक ढह जाने का मामला प्रकाश में आया है। इससे निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की कलई खुल गई है। नगर निगम ने प्रताप विहार सेक्टर-11 जी ब्लॉक में आरसीसी नाला का निर्माण कराया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के दूसरे दिन ही यह नाला ढह गया है। नाला ढहने से आस-पास के नागरिकों में रोष व्याप्त है। आरोप है कि प्रताप विहार सेक्टर-11 जी ब्लॉक स्थित चिल्ड्रन एकेडमी स्कूल के बाहर नाला बनाया जा रहा है, जिसमें ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। नाला 2 दिन पहले तैयार किया गया और वह सोमवार की शाम एकाएक ढह गया।
आरोप है कि स्थानीय लोगों ने घटिया निर्माण सामग्री लगाये जाने की शिकायत भी विजय नगर क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर से की थी। लेकिन जूनियर इंजीनियर ने लोगों को डांट डपट कर भगा दिया था। अब नाला ढ़हने से नगर निगम की छीछालेदर हो रही है। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि अधिकारियों को सूचित करने के बाद भी ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। उसी का परिणाम है कि लोग सोशल मीडिया पर कॉमेंट के जरिये नगर निगम पर अपना गुस्सा उतार रहे हैं। विजय नगर क्षेत्र में नगर निगम द्वारा कराये गये कामों की गुणवत्ता को लेकर पूर्व में भी आवाज उठती रही है। ताजा प्रकरण ने निर्माण विभाग के अधिकारियों को बगले झांकने को मजबूर कर दिया है।
















