लेखक-केके शर्मा
(लेखक समाजसेवी है। सोशल चौकीदार संस्था के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं। विभिन्न सम सामायिक मुद्दो पर बेबाकी से राय रखते हैं।)
उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद से सियासत काफी गरम है। हिंसा में 8 नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने है। केंद्र एवं राज्य सरकार को घेरने के लिए विपक्ष कोई मौका नहीं छोड़ रहा। मुद्दा विहीन विपक्ष हताशा में अनगर्ल आरोप मढ़कर माहौल बिगाड़ने पर आमादा है। लखीमपुर खीरी में उप-मुख्यमंत्री की जनसभा का कार्यक्रम था। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं को सभा स्थल पर ले जाया जा रहा था। भाजपा कार्यकर्ताओं को जबरन रोकने की कोशिश की गई। ऐसे में विवाद बढ़ने और पथराव होने पर भगदड़ मच गई। कुछ भाजपाइयों ने जान बचाने के लिए कार से भागने की कोशिश की। इस बीच कार से कुचल कर कुछ किसानों की मौत हो गई।
बाद में आक्रोशित भीड़ ने पीट-पीटकर भाजपा के 4 कार्यकर्ताओं की जान ले ली थी। लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत काफी हद तक हादसा था, मगर जिस तरीके से भाजपा कार्यकर्ताओं को तड़पा-तड़पा कर मारा गया, वह सीधे तौर पर हत्या है। देखा जाए तो लखीमपुर खीरी में माहौल बिगाड़ने की प्लानिंग पहले से कर ली गई थी। यदि भाजपा कार्यकर्ताओं को डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में जानने से रोका नहीं जाता तो बेवजह का बखेड़ा नहीं होता। विपक्ष अब फिजूल की राजनीति कर रहा है। हालाकि जागरूक नागरिक इससे वाकिफ हैं। विपक्ष का मकसद किसी तरह सत्ता में लौटने का है। इस मकसद में वह अगले कुछ साल तक कामयाब नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने बेहतर काम के जरिए समूचे विपक्ष पर भारी पड़ रहे हैं। मोदी द्वारा देश, समाज एवं जनहित में दिन-रात कार्य करने के बावजूद विपक्ष को अच्छाई कहीं दिखाई नहीं दे रही है। विपक्ष की मंशा सिर्फ मोदी विरोध की है। लालकिले मामले पर पुलिस ने एक गोली तक नहीं चलाई थी। इससे विपक्ष को काफी दुख पहुंचा था।विपक्ष चाहता था कि किसी तरह किसानों पर गोली चल जाए। विपक्ष ही नहीं ऐसे पड़ोसी देश जो भारत को विकसित होने नहीं देना चाहते हैं, वह चाहते थे कि किसी प्र्रकार किसानों पर गोली चल जाए, ताकि माहौल बिगड़े और सत्ता विरोधी आवाजें तेज हो सकें। लालकिला पर भीड़ के साथ गुंडे-बदमाश भेजे गए थे।
हालाकि सरकार की सतर्कता से किसानों पर गोली नहीं चलाई गई। इसके बाद भी कुछेक मामले ऐसे आए हैं, जब माहौल को खराब करने का प्रयास किया गया, जिससे किसानों पर पुलिस बल का प्रयोग हो और विपक्ष को अपनी राजनीति करने का मौका मिल सके। विपक्ष सत्ता में वापसी के लिए जरूर प्रयास करें। सार्थक और अच्छे प्रयास करें। घटिया प्रचार और हथकंडों के जरिए विपक्ष सत्ता के पास आने की बजाए और दूर होता जा रहा है। कांग्रेस की हालत खराब है। कांग्रेस ऐसे आत्मघाती कदम उठा रही है, जिसे समूचा भारत ही नहीं बल्कि विश्व भी जानता है।
सभी जानते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान से मिले हुए हैं। पाक प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख से उनके अच्छे संबंध हैं। किसी दुश्मन देश के प्रधानमंत्री, सेना प्रमुख और खालिस्तान के कमांडर से मिलना यूं ही संभव नहीं है। इसके पीछे कोई गहरी साजिश प्रतीत होती है। कांग्रेस का लगातार सिद्धू को आगे लाना भी कई सवाल खड़े करता है। सत्ता में आने के लिए कांग्रेस की इस प्रकार राजनीतिक उसके लिए बेहद नुकसानदायक है। नवजोत सिंह सिद्धू को यदि गलती से पंजाब की कमान मिल जाए तो पंजाब खतरे में पड़ जाएगा। साथ ही पंजाब से कांग्रेस भी खत्म हो जाएगी।
उत्तर प्रदेश के हाथरस में कुछ माह पहले हत्या के एक मामले में विपक्ष ने आसमान सिर पर उठा लिया था। मामले की कवरेज के लिए देश-विदेश से मीडिया कर्मी वहां पहुंच गए थे, मगर आज वहां कांग्रेस को कोसा जा रहा है। कांग्रेस की कृपा से योगी सरकार को दोबारा सत्ता में आने का मौका मिलना तय है। योगी सरकार को अगले विधान सभा चुनाव में फिर उतनी ही सीटें मिलनी तय हैं, जितनी पहले थीं। अपनी दुदर्शा के लिए कांग्रेस खुद जिम्मेदार है। कांग्रेस जितनी पुरानी पार्टी, आज उतनी गलती कर रही है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लोकप्रियता कम हो गई है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से अंतरकलह चल रही है। कई दिग्गज नेता कांग्रेस हाईकमान पर सवाल उठा चुके हैं। इसके बाद भी कांग्रेस को अपनी गलती का कतई अहसास नहीं हो रहा है। भविष्य में कांग्रेस को इसका और बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
















