अवस्थापना निधि की राशि के लिए नगरायुक्त ने शासन को भेजा पत्र
गाजियाबाद। शहर में विकास की गति को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम को धन की जरूरत है। शहर के समुचित विकास और आर्थिक तंगी को दूर करने को निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब नया कदम उठाया गया है। नगर निगम को अवस्थापना विकास निधि का पिछले 12 साल से बकाया लगभग 492 करोड़ रुपए नहीं मिल पाया है। इस धनराशि के लिए नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने सक्रियता दिखाई है। उन्होंने इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन एवं प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र भेजा है। बकाया धनराशि नगर निगम के खाते में ट्रांसफर करने की अपील की गई है।
पत्र में नगरायुक्त तंवर ने कहा है कि अवस्थापना विकास निधि की राशि वित्त वर्ष 2010-11 से बकाया है। 2012-13 में कुछ नहीं मिल पाया और 2019-20 व 2020-21 में भी रकम रोक ली गई। 12 साल से किसी भी साल में पूरा पैसा नहीं दिया गया है। ऐसे में बकाया धनराशि बढ़कर करीब 492 करोड़ रुपए हो गई। नगर निगम एवं निकाय चुनाव इसी साल होने हैं। वहीं, ठेकेदारों ने भुगतान न मिलने से काम रोक दिया है। चुनावी साल में पार्षदों की अब चिता बढ़ गई है कि बिना पैसे के काम कैसे होंगे।
नगर निगम की शनिवार को हुई बोर्ड बैठक में पार्षदों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। महापौर आशा शर्मा से भी कहा कि सभी पार्षदों के साथ लखनऊ चलकर अवस्थापना निधि का पैसा मुक्त कराना चाहिए। भाजपा पार्षद दल के नेता पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना है कि पिछले बजट चर्चा में भी यह मुद्दा उठाया था। अवस्थापना निधि का प्रविधान विकास कार्य के लिए किया गया है, जिसको पैसा संपत्तियों की रजिस्ट्री होने पर पैसा स्टांप शुल्क से मिलने वाले राजस्व से मिलता है।
यह कोई अनुदान नहीं है। हर बैनामे पर शहरवासियों से 2 प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क इसीलिए लिया जाता है कि शहर के विकास के लिए यह पैसा अवस्थापना निधि के रूप में लौटाया जाएगा। इस शुल्क में 0.75 प्रतिशत की हिस्सेदारी नगर निगम की अवस्थापना निधि की होती है। इसलिए पैसा मिलना जरूरी है। नगर आयुक्त ने प्रमुख सचिव को भेजे गए पत्र में कहा कि वर्ष-2010-11 में 10 करोड़ 70 लाख, वित्त वर्ष-2011-12 में 6 करोड़ 24 लाख, 2012-13 में 51 करोड़ 89 लाख, 2013-14 में 46 करोड़ 15 लाख, 2014-15 में 28 करोड़ 75 लाख, 2015-16 में 17 करोड़ 23 लाख, 2016-17 में तीन करोड़ 66 लाख, 2017-18 में 5 करोड़ 59 लाख, 2018-2019 में 62 करोड़ 78 लाख, 2019-20 में 82 करोड़ 99 लाख, 2020-21 में 72 करोड़ 90 लाख, 2021-22 में 102 करोड़ 79 लाख रुपए बकाया है। कुल मिलाकर 491 करोड़, 76 लाख रुपये शासन पर बकाया हैं।
शहर के समुचित विकास के लिए नगर निगम कृत संकल्पित है। विकास कार्यों को गति मिल सके, इसके लिए अवस्थापना निधि की बकाया राशि के लिए शासन से पत्र व्यवहार किया गया है। बकाया रकम मिलने से विभाग की माली हालत में भी सुधार हो सकेगा।
महेंद्र सिंह तंवर
नगरायुक्त
गाजियाबाद नगर निगम
















