जनता त्रस्त निगम कर्मचारी मस्त

– पांच साल से लीकेज है सरकारी पानी की टंकी
– रामलीला ग्राउंड में जलभराव से स्थानीय निवासी परेशान
– लीकेज सही करने के नाम पर करते हैं खानापूर्ति

अश्वनी शर्मा, बरेली। जनता की समस्याओं पर सरकारी तंत्र किस कदर हावी है, इसकी बानगी जोगी नवादा के रामलीला ग्राउंड में पांच साल पहले बनी सरकारी पानी की टंकी की दुर्दशा से लगाया जा सकता है। पिछले पांच साल से पानी की टंकी लीकेज है, जिससे लगातार पानी निकलता रहता है। लगातार पानी निकलने से रामलीला ग्राउंड जलभराव होने से आसपास रहने वाले लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर निगम अधिकारियों से इस संबंध में कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का स्थायी निराकरण नहीं हो सका है। हां, निगर अधिकारी व कर्मचारी समस्या को जड़ से दूर करने की बजाय अक्सर इंजन से पानी पड़ोस के नाले में निकलवा देते हैं। लेकिन कुछ दिन बाद ही फिर जलभराव हो जाता है।
मुहल्ला जोगी नवादा के रामलीला ग्राउंड के पास श्री नगर कालोनी निवासी प्रमोद शर्मा ने बताया कि पांच साल पहले उनके घर के सामने रामलीला मैदान में सरकारी पानी की टंकी नगर निगम द्वारा इसलिए लगवाई गई ताकि स्थानीय लोगों की स्वच्छ पानी मिल सके। टंकी बनने की लोगों में खुशी भी थी। लेकिन टंकी बनने के कुछ दिन बाद ही टंकी में लीकेज हो गया। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत नगर निगम अधिकारियों से की। जिस पर निगम कर्मचारियों ने जुगाड़ कर लीकेज बंद कर दिया। लेकिन कुछ दिन बाद फिर से लीकेज खुल गया और लगातार पानी बहने लगा। इससे रामलीला मैदान में जलभराव होने से तालाब बन गया। जब दोबारा नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की तो इस बार लखनऊ से जांच टीम आई। लेकिन फिर वही ठाक के तीन पात। जांच टीम मौका मुआयना कर वापस नहीं लौटी। आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है। यही नहीं, उनके घर के पास ही कई मुहल्ला का कूड़ा भी डाला जाता है।। जिससे दिनरात स्थानीय लोग हवा के रूख के साथ बदबू आने से परेशान हैं। लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है। लोगों का जीना मुहाल है।

स्थानीय निवासी रामेश्वर दयाल का कहना है कि टंकी में लीकेज की समस्या पांच साल से है। घर के सामने ही तालाब बन गया है। वहीं अगर बारिश हो जाए तो घर के अंदर ही पानी घुस जाता है। सबसे बड़ी परेशानी तो यह है कि आसपास रहने वाले लोग अक्सर मौसमी बीमारियों से ग्रसित रहने लगे हैं। समस्या को लेकर अक्सर निगम अधिकारियों व कर्मचारियों से शिकायत करते हैं। लेकिन कोई उचित जवाब नहीं मिलने से निराश होकर बैठ जाते हैं। खास बात तो यह है कि यहां रहने वाले लोग तीन पार्षद के क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। हां, निगम कर्मचारी अक्सर आते हैं और इंजन से पानी खींचकर चले जाते हैं। कुछ दिन बाद ही फिर पानी भर जाता है।

वहीं इस मामले में टंकी आपरेटर राजेंद्र का कहना है कि वो तो बस टंकी परिसर की देखभाल करते हैं। साथ ही पानी की सप्लाई का कार्य देखते हैं। हालांकि पानी की टंकी में लीकेज पांच साल से है। इस समस्या को दूर करने की जिम्मेदारी निगम के बड़े अधिकारियों की है। उन्हीं के हाथ में इस समस्या का निराकरण है।