हरिद्वार। पंचायती अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि मां गंगा का विशेष महत्व है। गंगा नदी अपने विशेष जल और इसके विशेष गुण के कारण काफी मूल्यवान मानी जाती है। इसका जल अपनी शुद्धता और पवित्रता को काफी समय तक बनाए रखता है। तंत्र सम्राट बाबा कामराज महाराज की कर्मभूमि श्री दक्षिण काली पीठ में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने मां गंगा की महत्ता पर प्रकाश डाला। श्री दक्षिण काली पीठ में बाबा कामराज महाराज की जयंती मनाई गई।
इस दौरान आचार्य कैलाशानंद गिरी ने कहा कि गंगा मैया जीवनदायिनी है। गंगा का जन्म भगवान विष्णु के पैरों से हुआ था। वह भगवान शिव की जटाओं में निवास करती हैं। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान, पूजन और दर्शन करने से पापों का नाश होता है। गंगा स्रान से व्याधियों से मुक्ति मिलती है। जो तीर्थ गंगा किनारे बसे हैं, वे अन्य की तुलना में ज्यादा पवित्र माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि गंगा नदी का जल सालों-साल तक प्रयोग करने पर और रखने पर भी खराब नहीं होता है। इसके जल के नियमित प्रयोग से रोग भी दूर हो जाते हैं।
विज्ञान भी गंगा मैया के दैवीय गुणों को स्वीकार करता है। अध्यात्मिक जगत में इसे सकारात्मक ऊर्जा का चमत्कार कह सकते हैं। मां गंगा का जन्म वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि के दिन हुआ था। इस बार यह तिथि 18 मई को थी। उन्होंने बताया कि गंगा सप्तमी, गंगा दशहरा, देव दीपावली, ये तीन दिन गंगा मैया के महत्वपूर्ण दिन होते हैं। इन तीनों दिन श्रद्धालु भी गंगा मैय्या के प्रति अपनी अटूट आस्था को प्रकट करते हैं। श्रद्धालु गंगाजल का सेवन कर मानवीय मौलिक सिद्धांतों को स्वीकार करते हैं। गंगा मैय्या से करोड़ों भारतीयों की आस्था जुड़ी है।
आचार्य कैलाशानंद गिरी महाराज ने तंत्र सम्राट बाबा कामराज महाराज के विषय में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 800 वर्ष पूर्व बाबा कामराज महाराज ने सिद्ध पीठ श्री दक्षिण काली मंदिर की स्थापना की थी। इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। सच्चे हृदय से यहां पूजा-अर्चना करने पर श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। आचार्य कैलाशानंद गिरी ने बताया कि मां काली ने बाबा कामराज को स्वप्न में इस मंदिर की स्थापना करने का निर्देश दिया था। उन्होंने बताया कि इस स्थान पर बाबा कामराज ने आल्हा और उनकी पत्नी मछला को दीक्षा भी दी थी।
इस अवसर पर नरेंद्र चौधरी, बाबा हठयोगी, स्वामी सत्यव्रतानंद, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत रोहित गिरी, स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, कृष्णानंद ब्रह्मचारी, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी, आचार्य पवन दत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पांडे, लाल बाबा, स्वामी अनुरागी आदि मौजूद रहे। बता दें कि आचार्य कैलाशानंद गिरी महाराज ने बाल्यकाल से खुद को सनातन संस्कृति की रक्षा और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। सनातन संस्कृति की पताका को देश-विदेश में फहराने के लिए वह शिद्दत से जुटे हैं।















