ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के धनोरी वेटलैंड का जल्द कायापलट हो जाएगा। वेटलैंड व आस-पास के क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए वन विभाग को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की आवश्यकता थी। यमुना प्राधिकरण की तरफ से एनओसी जारी कर दी गई है। वेटलेंड व आस-पास के 112 हेक्टेयर क्षेत्र को संरक्षित करने का रास्ता खुल गया है। इससे पर्यावरणप्रेमियों में भी खुशी का माहौल है। धनोरी वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने वन विभाग प्रयासरत था।
इसके लिए यमुना प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की डिमांड की गई थी। एनओसी मिलने से वेटलैंड को संरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में धनोरी वेटलैंड आता है। अभी तक इसे संरक्षित करने का कोई प्रबंध नहीं था। वन विभाग ने इसके लिए कवायद आरंभ की। यह वेटलैंड प्रवासी पक्षियों का सर्दियों में मुख्य प्रवास स्थल है। प्रतिवर्ष वहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। राज्य पक्षी सारस का भी धनौरी वेटलैंड प्रमुख प्रवास क्षेत्र माना जाता है।
इसलिए इसे रामसर साइट घोषित कराने की मांग जोरों पर उठ रही थी। अब इस दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ गए हैं। उधर, यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि धनोरी वेटलैंड के संरक्षण के लिए वन विभाग की तरफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग की गई थी। प्राधिकरण ने एनओसी जारी कर दी है। वेटलैंड के संरक्षण में प्राधिकरण स्तर से हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
















