नई दिल्ली। देश की राजधानी में आबकारी नीति पर मचा बवंडर अब तक शांत नहीं हो पाया है। आबकारी नीति को लागू करने में केजरीवाल सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। चौतरफा घिरने के बाद सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा है। शराब बिक्री की व्यवस्था में बदलाव कर दिया गया है। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की मुश्किलें निरंतर बढ़ रही हैं। इस बीच दिल्ली के उप-राज्यपाल ने विजिलेंस रिपोर्ट मिलने के बाद बड़ा एक्शन लिया है। आबकारी नीति में भारी अनियमितता बरते जाने पर 11 अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है। इस कार्रवाई से सरकार में भी हड़कंप मच गया है।
एलजी के कदम से हड़कंप
दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने आबकारी नीति पर विजिलेंस रिपोर्ट आने के बाद सख्त रूख अपनाया है। घोटाले के आरोप में आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण, तत्कालीन आबकारी आयुक्त दानीक्स आनंद कुमार तिवारी समेत 11 अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है। आबकारी नीति को लागू करने में लापरवाही बरतने पर यह कार्रवाई की गई है। उप-राज्यपाल ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए विजिलेंस को अनुमति प्रदान कर दी है। अलबत्ता इन अधिकारियों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ना तय हैं।
कई हजार करोड़ का नुकसान
आबकारी नीति पर मचे घमासान के बीच दिल्ली सरकार के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने पहली बार यह माना है कि दिल्ली सरकार को नई आबकारी नीति 2021-22 के तहत कई हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। सिसोदिया पर आबकारी मंत्री का प्रभार भी है। हालाकि डिप्टी सीएम सिसोदिया ने एलजी पर आरोप मढ़ दिया। जिन्होंने विगत 17 नवंबर 2021 से लागू हुई नई प्रणाली पर अंतिम क्षण में यू-टर्न ले लिया। सिसोदिया का कहना है कि अब सीबीआई को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की जा रही है। दिल्ली सरकार इस मामले में अपना बचाव करती दिखाई दे रही है।
बचाव में उतरी आप सरकार
डिप्टी सीएम एवं आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि आबकारी नीति 2021-22 को लागू करने से पहले फाइल को 2 बाद उप-राज्यपाल के पास भेजा गया था। पहली बार तत्कालीन एलजी अनिल बैजल ने कुछ सुझावों और बदलावों के साथ फाइल वापस भेज दी थी, जिसे दिल्ली सरकार ने शामिल किया था। सिसोदिया ने कहा है कि एलजी द्वारा सुझाए गए जरूरी बदलाव करने के बाद फाइल को नवंबर के पहले सप्ताह में दूसरी बार भेजा गया था। नई नीति को 17 नवंबर से लागू किया जाना था और एलजी ने लॉन्च से ठीक 48 घंटे पहले 15 नवंबर को फाइल लौटा दी और हमें इसमें एक बड़ा बदलाव करने को कहा गया। एलजी ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों में शराब की दुकानों को अनुमति देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और नगर निगम से अनुमति लेनी होगी।
















