-रेलवे और प्रशासन के विरोध के बावजूद आरडब्लूए के संघर्ष की हुई जीत
गाजियाबाद। स्वदेशी चौक विजय नगर में शुक्रवार को लाइनपार क्षेत्र आरडब्लूए द्वारा प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी ने बताया की दरअसल धोबी घाट आरोबी की मांग 16 अप्रैल 2005 को प्रताप विहार समाज कल्याण महासंघ द्वारा उठाई गई थी। मांग को डा आरके आर्या द्वारा 19 मार्च 2006 और 20 जनवरी 2010 को दोहराया गया। 23 अप्रैल 2011 को आरडब्लूए फेडरेशन गाजियाबाद ने धोबी घाट के लिए रेलवे से संपर्क करने के लिए एक समिति बनाई। 8 अक्टूबर 2011 को हस्ताक्षर अभियान प्रारंभ किया गया।
11 अक्टूबर 2011 को डिविजनल रेलवे मैनेजर अवनीश लोहानी के साथ दिल्ली में बैठ की गई और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई। जिस कारण उन्हें फेसिब्लिटी रिपोर्ट देने का वादा करना पड़ा। 25 नवंबर 2011 को स्थानीय अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को इनफेसिबल बताया। 9 दिसंबर 2011 को नगर निगम, पीडब्लूडी, ब्रिज कॉरपोरेशन क ेसाथ मौके पर जाकर सर्वे किया गया और तकनीकी बातें बताई गई। तब कहीं जाकर उन्होंने फेसिब्लिटी रिपोर्ट दी। 10 दिसंबर 2011 को एक प्रेसवार्ता कर शहर को बताया गया की धोबी घाट आरोबी बनना संभव है।
लाइन पार आरडब्लूए फेडरेशन के अध्यक्ष डा आरके आर्या ने बताया की 2014 मे लोकसभा प्रत्याशी जनरल वीके सिंह ने आरडब्लूए फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक फेडरेशन के चैयरमेन कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी के निवास स्थान पर की। जिसमे मांग की गई की धोबी घाट आरोबी आपकी प्राथमिकताओं मे प्रथम होना चाहिए और ऐसा हुआ भी। 24 जून 2016 को डा आरके आर्या, राम अवतार यादव, वीपी सिंह की उपस्थिति मे सांसद जनरल वीके सिंह और मनोज सिन्हा ने धोबी घाट आरओबी का शिलान्यास कर दिया। यह निर्माण 18 महीने मे पूरा होना था। मगर लगातार समस्याए आती रही और उसके समाधान भी होते रहे।
आरडब्लूए की तरफ से कई बार सांसद एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की गई और पत्र भी लिखे गए। (47 पत्रों और बैठकों के दस्तावेज हमारे पास मौजूद हैं) और अब अंततोगत्वा धोबी घाट आरोबी को दो पहियां वाहनों के लिए खोल दिया गया और चार पहियां वाहनों के लिए खुलने वाला है। इस संघर्ष में सभी लोगों का सहयोग रहा है। लेकिन जनरल वीके सिंह और पूर्व जीडीए वीसी संतोष यादव का विशेष सहयोग रहा। जिन्होंने इस योजना को अंजाम तक पहुंचाने मे असाधारण सहयोग दिया है।















