शहर के 40 बड़े शोरूम पर स्टांप विभाग कसेगा शिकंजा

-स्टांप ड्यूटी बचाने के चक्कर में नहीं कराया किरायानामा को पंजीकृत

गाजियाबाद। बगैर स्टांप शुल्क जमा कराए एवं पंजीकृत किरायानामा नहीं होने के चलते शहर में व्यवसाय के लिए किराए पर चल रहे 40 बड़े शोरूम पर अब जल्द शिकंजा कसेगा। स्टांप विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। इन सभी शोरूम संचालकों ने किराए का पंजीकरण नहीं कराया है। नोटिस भेजने के बाद भी विभाग को कोई जवाब नहीं दिया गया।ऐसे में इन सभी शोरूम मालिकों से किराएनामे की जांच करने के बाद स्टांप शुल्क वसूला जाएगा। एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक श्रीवास्तव का कहना है कि बगैर स्टांप शुल्क दिए किराए पर दिए गए शोरूम मालिकों के खिलाफ अब कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि विद्युत वितरण निगम से बड़े शोरूम के विद्युत कनेक्शन की सूची तैयार कराई जा रही है। पिछले दिनों ऐसे करीब 100 शोरूम संचालकों को नोटिस भेजकर 15 दिन में किराएनामे की प्रतिलिपि मांगी गई थी। इनमें से 40 शोरूम संचालकों ने कोई जवाब नहीं दिया हैं। इनके खिलाफ अब कार्रवाई की जाएगी।

शोरूम संचालकों से अपील है कि वह खुद ही किराएनामे पर देय स्टांप शुल्क जमा करें। नोटिस के बाद इन पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।जनपद में लाखों रुपए प्रति माह किराए पर शोरूम व अन्य कार्यालय चल रहे हैं।अगर कोई ऑफिस या संस्थान किराए पर संचालित की जाती है तो नियमानुसार उसके किरायानामा पंजीकृत कराना जरूरी है। केवल सरकारी व सेेमी प्राइवेट कंपनियों के दफ्तरों के किराए किराएनामे ही पंजीकृत होते हैं। यह सभी किरायानामा रजिस्टर्ड कराते समय नियमानुसार स्टांप शुल्क अदा करते हैं। वहीं, जिले में बड़ी संख्या में निजी शोरूम संचालित हो रहे हैं। लेकिन किसी भी शोरूम का किरायानामा पंजीकृत नहीं करा जाता। किराएनामें का पंजीकरण न कराने पर विभाग को स्टांप शुल्क के रूप में राजस्व की हांनि हो रही है। जनपद में चल रहे किराए के व्यवसाय पर उचित स्टांप शुल्क लगता है। लेकिन मात्र 15 से 20 फीसदी मामलों में ही उचित स्टांप शुल्क देकर किरायानामा रजिस्टर्ड कराया जाता है। 80 फीसदी किराएदारी मात्र 100 रुपए के स्टांप पर तय हो जाती है। इससे विभाग को करोड़ों रुपए के राजस्व की हांनि हो रही है।

जिला प्रशासन ने विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों से 10 किलोवाट से अधिक के कॉमर्शियल कनेक्शन की सूची मांगी थी। इनमें विद्युत कनेक्शन लेते समय किरायानामा लगाया हुआ होता है। विद्युत निगम की ओर से अभी करीब 100 शोरूम व कॉमर्शियल संस्थानों की सूची दी गई है। इसके आधार पर विभाग ने इन सभी को नोटिस जारी करते हुए किराए नामे की प्रतिलिपि मांगी थी। इससे आगे की भी सूची तैयार की जा रही है। जिन 100 शोरूम संचालकों को नोटिस जारी किया गया था। उनमें से 40 ने नोटिस का जवाब भेज दिया है। उन्होंने बताया कि वह खुद ही शोरूम के संचालक है।जिस शोरूम में व्यवसाय कर रहे हैं,वह उनकी खुद की संपत्ति हैं। वहीं,स्टांप विभाग के नोटिस जारी होने के बाद 20 संचालकों ने अपना किराया नामा पंजीकृत कराकर उसकी प्रतिलिपि विभाग के पास जमा करा दी है।

यह संचालक अब कार्रवाई से बच गए हैं। लेकिन विभाग इनकी यह भी जांच कर रहा है कि यह कितने समय से बिना पंजीकृत के काम कर रहे थे। किराएनामे में एक साल के लिए किराए का चार फीसदी स्टांप शुल्क देना होता है। इसमें 2 फीसदी स्टांप शुल्क व दो फीसदी विकास शुल्क होता है। वहीं,ग्रामीण क्षेत्र में केवल दो फीसदी स्टांप शुल्क ही देय होता है। एक से पांच साल तक के किराएनामे पर दिए जाने वाले किराए के अनुसार स्टांप शुल्क का एवरेज निकाला जाएगा।यानि कि एक साल का किराया व उसके बाद हर साल जितने फीसदी की बढ़ोतरी तय की गई है वह सभी मिलाकर जो भी रकम बैठेंगी। उसी के एवरेज के अनुसार चार फीसदी स्टांप शुल्क इन शोरूम संचालकों से लिया जाएगा।