-निराश्रितों ने लिया रैन बसेरों का आसरा, फॉगिंग, सफाई की व्यवस्था को बेहतर करने में जुटे अधिकारी
-बढ़ती सर्दी को देख नगर आयुक्त ने दिए व्यवस्थाओं को बढ़ाने के निर्देश
गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा बढ़ती ठंड को देखते हुए अलाव की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। जिसके क्रम में लगभग 30 स्थान पर अलाव की व्यवस्था प्रतिदिन सायं काल में कराई जा रही है। कड़ाके की ठंड के चलते नगर निगम द्वारा शहर के लोगों के लिए की गई अलाव की व्यवस्था संजीवनी का काम कर रही है। ठंड के सितम को देखते हुए नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने भी अधिकारियों को व्यवस्थाओं को बढ़ाने के निर्देश दे दिए है। जिसमें आश्रय स्थलों पर मूल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारी को अवगत कराया। जिसके क्रम में निगम अधिकारी रैन बसेरे की व्यवस्था में कार्यवाही कर रहे हैं। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था भी कराई जा रही है, बसअड्डे, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थलों के बाहर, चिकित्सालयों के बाहर, ठंड से परेशान लोगों के लिए अलाव की व्यवस्था कराई गई है।
स्थाई के साथ-साथ नगर निगम द्वारा अस्थाई रैन बसेरे की व्यवस्था भी की गई है। रेन बसेरों की सूचना के लिए नगर आयुक्त के आदेश पर शहर में दिशा सूचक भी लगाए जाएंगे। कोई भी निराश्रित सड़कों पर ना सोए इसका विशेष ध्यान भी रखा जा रहा है। जिसके लिए जोन प्रभारी की ड्यूटी लगाई गई है, शहर में लगभग 6 स्थान पर अस्थाई रैन बसेरे बन रहे हैं। मिर्जापुर डबल टंकी के पास विजयनगर, कोतवाली के सामने जीटी रोड, रोडवेज बस अड्डा मोहन नगर, पैसिफिक मॉल के सामने कौशांबी, रेलवे स्टेशन रोड साहिबाबाद, हापुर रोड कवि नगर फ्लाईओवर के पास व्यवस्था की गई है। रैन बसेरों में फॉगिंग व सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को निर्देश दिए हैं।
संयुक्त नगर आयुक्त ओमप्रकाश ने बताया महापौर एवं नगर आयुक्त के निर्देशानुसार सभी रैन बसेरे व्यवस्थित हैं। सड़कों पर सोने वाले निराश्रितों से समस्त कार्यवाही पूर्ण करते हुए आश्रय स्थलों के लिए अवगत कराया जा रहा है। जोन के प्रभारी भी अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिदिन जोनों की व्यवस्था को संभाल रहे है। जिसमें मुख्य रुप से आश्रय स्थलों पर, धार्मिक स्थलों पर, रेलवे स्टेशन पर बस स्टैंड पर सार्वजनिक कार्यालयों के बाहर व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लोग अलाव से राहत का अनुभव कर रहे हैं। समय के रहते शाम होने से पूर्व लकडिय़ां चयनित स्थानों पर चली जाती है। ताकि सर्दी बढऩे पर लोगों को राहत का अनुभव हो सके, आश्रय स्थलों पर भी अन्य मूल सुविधाओं को भी बढ़ाया गया है। जरुरत होने पर अलाव की व्यवस्था को और आगे बढ़ाया जा सकता है।


















