-सेल्फ एसेसमेंट के लिए टैक्सदाताओं का जागरुक करेंगे जोनल प्रभारी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम सीमा क्षेत्र में कर प्रणाली को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में अब एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नगर निगम के रडार पर अब वे 75,000 से अधिक आवासीय और व्यावसायिक भवन हैं, जो अभी तक हाउस टैक्स के दायरे से बाहर हैं। इन सभी भवनों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए नगर निगम ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। गुरुवार को नगर निगम कार्यालय में अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार की अध्यक्षता में इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा समेत वसुंधरा, विजयनगर, कविनगर, मोहननगर और सिटी जोन के सभी जोनल प्रभारियों ने भाग लिया। बैठक में तय किया गया कि अब हर जोनल प्रभारी को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे भवनों की सूची तैयार करें जो अब तक टैक्स से अछूते रहे हैं। इन्हें जल्द से जल्द टैक्स दायरे में लाकर नोटिस भेजे जाएंगे और टैक्स वसूली की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने साफ किया कि अब हाउस टैक्स के मामले में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया कि करदाताओं को सेल्फ एसेसमेंट के लिए जागरूक किया जाए ताकि लोग स्वयं ही अपने टैक्स का मूल्यांकन कर सकें। अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार ने बताया कि यह अभियान नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसमें अगले माह यानी मई से टैक्स वसूली की रफ्तार और तेज की जाएगी। जिन भवनों ने अब तक टैक्स नहीं भरा है, उन पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम इस अभियान को इस रूप में भी देख रहा है कि जितने अधिक करदाता टैक्स के दायरे में आएंगे, उतनी ही ज्यादा सुविधाएं नगर निगम की ओर से शहर को दी जा सकेंगी। सेल्फ एसेसमेंट की सुविधा को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर सुलभ बनाया जाएगा, जिससे टैक्सदाताओं को कोई कठिनाई न हो और कर संग्रहण भी सरलता से हो सके। टैक्स विभाग की टीम को इस संबंध में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे करदाताओं को संपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकें। गाजियाबाद नगर निगम का यह अभियान ना केवल टैक्स व्यवस्था को मजबूत बनाएगा, बल्कि शहर की वित्तीय स्थिति को भी सशक्त करेगा। उम्मीद की जा रही है कि सख्ती और पारदर्शिता के इस नए मॉडल से गाजियाबाद को एक जिम्मेदार और स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में एक और मजबूत कदम मिलेगा।
















