नाले का काम सराहनीय, लेकिन अधूरी योजना बढ़ा रही समस्याएं: पार्षद कुसुम गोयल

-महापौर को पत्र लिखकर पार्षद ने की सीएनडीएस कार्य में दो अहम परियोजनाएं जोडऩे की मांग
-ट्रैफिक जाम और जलभराव के स्थायी समाधान पर दिया जोर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर में चल रहे विकास कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों ने अब सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में कौशांबी वार्ड-72 की पार्षद कुसुम मनोज गोयल ने महापौर सुनीता दयाल को एक पत्र लिखते हुए बृज विहार से यूपी गेट तक बनाए जा रहे नाले के निर्माण कार्य की सराहना के साथ कुछ और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इसमें जोडऩे की मांग की है। पार्षद कुसुम गोयल ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि इस समय बृज विहार से यूपी गेट तक नाले का निर्माण कार्य सीएनडीएस (सेंट्रल डिवीजनल नाला सिस्टम) द्वारा कराया जा रहा है, जो न केवल अत्यंत आवश्यक था, बल्कि बेहद गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नाला कच्चा होने के कारण अब तक उसका पानी जमीन में रिसकर भूमिगत जल को दूषित कर रहा था। लेकिन इस निर्माण कार्य के पूर्ण होने के बाद बहाव सुगम होगा और जल प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

हालांकि, पार्षद ने बताया कि इस योजना में दो अत्यंत आवश्यक क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है, जिससे भविष्य में समस्याएं बनी रह सकती हैं। उन्होंने लिखा कि कौशांबी स्थित यसोदा अस्पताल से अंसल मॉल तक का जो नाला है, उसे भी इस निर्माण परियोजना में शामिल किया जाना चाहिए था। यह क्षेत्र जल निकासी की दृष्टि से अति संवेदनशील है और यदि इसे नजर अंदाज किया गया तो नाले के अधूरेपन की वजह से जलभराव और गंदगी की समस्या बनी रहेगी। इसके अतिरिक्त, वैशाली सेक्टर-1 और 2 को जोडऩे वाली पुलिया की स्थिति पर भी पार्षद ने चिंता जाहिर की है।

उन्होंने बताया कि यह पुलिया सिंगल लेन की है, जबकि इसे जोडऩे वाली सड़क डबल लेन है। इसी मार्ग पर स्थित मैक्स हॉस्पिटल और चार बड़े स्कूलों की वजह से ट्रैफिक का दबाव अत्यधिक रहता है। यूपी गेट से प्रवेश करने पर यह मार्ग गाजियाबाद की ओर जाने वाला पहला मुख्य मार्ग है, और पुलिया संकरी होने के कारण यहां हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। पार्षद गोयल ने महापौर से मांग की है कि उक्त दोनों लंबित कार्यों को भी वर्तमान नाला निर्माण परियोजना में शामिल किया जाए और इन्हें भी सीएनडीएस के माध्यम से जल्द से जल्द कराया जाए, जिससे क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके और क्षेत्र की बुनियादी संरचना और अधिक मजबूत हो।