हरित भारत की ओर एक और कदम: विश्व पर्यावरण दिवस पर एनडीआरएफ ने दिखाई पर्यावरणीय जिम्मेदारी

-8वीं बटालियन एनडीआरएफ ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के संकल्प के साथ सैकड़ों पौधे लगाए, प्लास्टिक प्रदूषण हटाने का दिया संदेश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 8वीं बटालियन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक प्रेरणादायक पहल की गई। इस विशेष दिन को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी के रूप में मनाते हुए बटालियन ने शुक्रवार को अपने परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान चलाया और सैकड़ों पौधे रोपे। इस आयोजन में एनडीआरएफ के बचावकर्मियों के साथ-साथ उनके परिवारों और बच्चों ने भी सक्रिय भागीदारी की, जिससे यह अभियान एक सामूहिक जनजागरूकता कार्यक्रम में तब्दील हो गया। वृक्षारोपण अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना, हरित क्षेत्र को बढ़ावा देना और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रयासों को जनसहभागिता से जोडऩा रहा। बटालियन परिसर में पौधों की हरियाली केवल सौंदर्यवर्धन का प्रतीक नहीं, बल्कि आने वाले समय में सुरक्षित और सतत भविष्य की नींव मानी जा रही है।

इस अवसर पर कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे उप सेनानी कुणाल तिवारी ने सभी उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए वर्ष 2025 की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “प्लास्टिक प्रदूषण हटाओ” पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक प्रदूषण न केवल पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरा है, बल्कि मानवीय स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग कम करें और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं।

उप सेनानी तिवारी ने भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान एक पेड़ माँ के नाम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए इसे पर्यावरणीय संरक्षण से भावनात्मक जुड़ाव का अभिनव उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने माता-पिता के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति आभार का मिलाजुला रूप है, जो समाज में स्थायी बदलाव ला सकता है।

पर्यावरण दिवस के इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि एनडीआरएफ न केवल आपदाओं में राहत पहुंचाने वाली अग्रिम पंक्ति की संस्था है, बल्कि हरित भारत और सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी उसकी गहरी प्रतिबद्धता है। बचाव दलों की यह पहल युवाओं और समाज के अन्य वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह संदेश देती है कि हर नागरिक अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बन सकता है।