-आबकारी विभाग और स्वास्थ्य टीम की संयुक्त रेड, सिगरेट-गुटखा बेचने वालों पर चला कानून का डंडा
-आबकारी विभाग, स्वास्थ्य विभाग और तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ की संयुक्त कार्रवाई, जुर्माना वसूलने के साथ चलाया जनजागरूकता
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय नशा एवं तस्करी निषेध दिवस उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर 12 जून से 26 जून तक मनाए जा रहे नशा मुक्ति पखवाड़े के अंतर्गत गुरुवार को राजधानी लखनऊ में एक बड़ी कार्रवाई और जागरूकता अभियान देखने को मिला। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में आबकारी विभाग निरीक्षक राहुल सिंह, आबकारी निरीक्षक रामश्याम त्रिपाठी, सीएमओ ऑफिस से मेडि़कल ऑफिसर डॉ महेंद्र चौधरी, विनोद सिंह यादव, प्रभारी एंटी तंबाकू सेल प्रकोष्ठ सब-इंस्पेक्टर-रविन्द्र सिंह एवं स्टॉफ की टीम ने मुख्य चिकित्साधिकारी और जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के साथ मिलकर शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के आस-पास सघन अभियान चलाया। इस संयुक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य था देश के युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले घातक दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना, खासतौर पर युवा वर्ग को, जो तंबाकू, सिगरेट, गुटखा और अन्य नशे की आदतों की चपेट में तेजी से आ रहा है। अभियान के दौरान जिन स्थानों पर अवैध रूप से तंबाकू, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही थी, वहां सीधी कार्रवाई की गई। कई दुकानदारों के खिलाफ चालान काटे गए और मौके पर जुर्माना वसूला गया।
जिन दुकानों पर कानून की अनदेखी पाई गई, उन्हें चेतावनी देकर नोटिस भी थमाए गए। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि नशे के अवैध कारोबार को किसी भी रूप में सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लखनऊ को नशामुक्त बनाना हमारा संकल्प है। हमने संयुक्त कार्रवाई शुरू की है और यह केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला मिशन है। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों के पास किसी भी तरह की नशीली वस्तु की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है और नियम तोडऩे वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान आम लोगों को जागरूक करने के लिए तंबाकू से होने वाली बीमारियों, मानसिक व सामाजिक नुकसान और आर्थिक हानि की जानकारी देते हुए पम्फलेट वितरण, सीधी बातचीत और मौखिक काउंसलिंग भी की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि तंबाकू सेवन से होने वाले रोगों जैसे कैंसर, हृदय रोग, लिवर डैमेज, मुंह की बीमारियों आदि के बारे में विशेष जानकारी देकर लोगों को जागरूक किया गया। विशेषकर युवाओं को समझाया गया कि ये आदतें न सिर्फ उनके स्वास्थ्य के लिए घातक हैं, बल्कि उनके करियर और सामाजिक जीवन को भी नुकसान पहुंचाती हैं। जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह अभियान केवल शहर के कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे जनपद में फैलाया जाएगा, ताकि हर गली, हर मोहल्ले और हर संस्थान तक जागरूकता पहुंचे। इस संयुक्त कार्रवाई से एक तरफ जहां अवैध तंबाकू कारोबारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं दूसरी ओर जनता में सकारात्मक संदेश भी गया है कि अब नशे के खिलाफ सरकार और प्रशासन पूरी तरह सख्त रुख अपना चुके हैं।
अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि नशा मुक्ति पखवाड़ा के बाद भी ऐसे अभियान लगातार चलाए जाएंगे, ताकि लखनऊ को नशे से मुक्त और युवाओं को स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर किया जा सके। जिला आबकारी अधिकारी ने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत स्कूलों में शपथ कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता, और सोशल मीडिया कैंपेन भी चलाए जाएंगे, जिससे यह आंदोलन सिर्फ सरकारी पहल नहीं, बल्कि जनभागीदारी बन सके। जैसे-जैसे नशा मुक्ति पखवाड़ा अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, लखनऊ में यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि नशे के खिलाफ अब सिर्फ बात नहीं होगी, बल्कि ज़मीन पर असरदार कार्रवाई होगी और यह सिर्फ शुरुआत है।


















