– बहुत कम समय में अधिक बारिश होने के कारण शहर में फ्लैश फ्लड का खतरा उत्पन्न हो गया
– नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह कंट्रोल रूम से देते रहे निर्देश, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार ने सड़क पर संभाला मोर्चा
– सुशांत एक्वापोलिस में सड़क धंसने पर बिल्डर की लापरवाही उजागर, नगर आयुक्त ने लिया स्थलीय जायजा
– चीफ इंजीनियर, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, महाप्रबंधक जल, उद्याान प्रभारी, एग्जयूकेटिव इंजीनियरों ने अलग-अलग जोन में संभामोर्चा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बुधवार रात नगर निगम अधिकारियों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा। बारिश ने अग्नि परीक्षा ली जिसमें अधिकारियों ने मुश्तैदी दिखाकर परीक्षा पास की और शहरवासियों को बड़ी राहत दिलाई। सिर्फ चंद घंटों में 60 मिलीमीटर बारिश का रिकार्ड बना। इससे फ्लैश फ्लड (अचानक होने वाली बारिश से आने वाली बाढ़) का खतरा उत्पन्न हो गया। बारिश की भयावहता को देखते हुए नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने स्वयं मोर्चा संभाला। नगर निगम के इमरजेंसी कंट्रोल रूम को तत्काल सुपर एक्टिव कर दिया गया। रात भर नगर आयुक्त कंट्रोल रूम में डटे रहे और वहां से शहर के हर क्षेत्र की जानकारी लेते रहे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते रहे। नगर आयुक्त ने सभी अधिकारियों को रात में सड़क पर उतार दिया और उनकी अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी लगाई। अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, चीफ इंजीनियर नरेंद्र चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, महाप्रबंधक जल कामाख्या प्रसाद आनंद, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, एई आश कुमार सहित अन्य अधिकारी जल निकासी की व्यवस्था को संभालने में लगे रहे। शहर के निचले हिस्से और अवैध व कच्ची कॉलोनियों को छोड़ दें तो अधिकांश हिस्सों में सुबह तक जल निकासी सुचारू हो गई। जिन हिस्सों में जल भराव रहा वहां सुबह मोटर और टैंकर लगाकर जल निकासी कराई गई। एनएचएआई की गलत डिजाइनिंग के कारण लालकुआं और एनएच-24 के आस-पास सबसे अधिक जल भराव होता है। यहां पर सबसे अधिक पानी जमा हुआ और इससे निपटने में निगम अधिकारियों को सबसे अधिक परेशानी हुई। जलभराव के सभी हॉटस्पॉट्स पर 90 से अधिक पंप सेट लगाकर जल निकासी का कार्य कराया गया, जिससे सुबह तक अधिकांश क्षेत्रों में राहत मिल गई।
जैसे ही बारिश ने रफ्तार पकड़ी, नगर आयुक्त ने स्वास्थ्य, निर्माण और जलकल विभाग की संयुक्त टीमों को अलर्ट कर दिया। नगर आयुक्त ने रात में ही सभी अधिकारियों को फील्ड में भेजा, ताकि जलभराव की स्थिति न बने। जलनिकासी के लिए अतिरिक्त उपकरण और मैनपॉवर लगाया गया। यूपी गेट, डायमंड फ्लाईओवर, भोपुरा, लालकुआं, अप्सरा बॉर्डर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में 90 से अधिक पंप सेट से जलनिकासी कराई गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने रातभर निगरानी की। सुबह होते-होते ज्यादातर स्थानों पर सामान्य स्थिति बहाल हो गई। बृहस्पतिवार तड़के नगर आयुक्त ने टीम के साथ गौशाला अंडरपास, क्रॉसिंग रिपब्लिक, डूंडाहेड़ा, और सुशांत एक्वापोलिस क्षेत्रों का निरीक्षण किया। गौशाला अंडरपास में जलभराव नहीं मिला, जो समय से की गई कार्रवाई का प्रमाण था। निरीक्षण के दौरान सुशांत एक्वापोलिस और डूंडाहेड़ा क्रॉसिंग पर सड़क धंसने की घटना सामने आई।
क्षेत्रीय निवासियों ने बताया कि यह पूरी तरह से बिल्डर की लापरवाही है। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि इस दुर्घटना में नगर निगम की कोई भूमिका नहीं है। संबंधित विभाग को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। नगर आयुक्त ने टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए। नगर निगम की रात्रिकालीन मुस्तैदी ने साबित किया कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और समयबद्ध कार्रवाई से किसी भी आपदा को नियंत्रण में लाया जा सकता है।
शहवासियों और व्यापारियों ने नगर निगम की त्वरित कार्रवाई की खुले दिल से सराहना की। अपर नगर आयुक्त अवनींद्र ने पूरी रात फील्ड से टीम की निगरानी की। नगर आयुक्त ने सभी टीमों को सराहते हुए निर्देश दिए कि बरसात का मौसम है, 24&7 अलर्ट रहना होगा। निगम को जनता की आंखों में भरोसा बनकर दिखना है। गाजियाबाद नगर निगम ने यह सिद्ध किया कि यदि इच्छाशक्ति हो और टीम वर्क सही दिशा में चले, तो आपदा भी अवसर में बदली जा सकती है। बारिश तो भारी थी, पर व्यवस्था उससे कहीं ज्यादा मजबूत निकली।

















