उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने उन बिल्डरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिन्होंने हाईटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने के नाम पर तो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूर करा ली, लेकिन उसमें वायदा किए गए एलआईजी (निम्न आय वर्ग) और ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) भवनों का निर्माण करना ही भूल गए। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि अब ऐसे बिल्डरों की बैंक गारंटी जब्त की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। जीडीए ने अपनी जांच और निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया है। उपाध्यक्ष अतुल वत्स के निर्देश पर शौर्यपुरम योजना में ड्रोन सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे से यह पता लगाया जा रहा है कि जिन टाउनशिप और ग्रुप हाउसिंग योजनाओं में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस भवनों का निर्माण दिखाया गया था, वहां वास्तव में काम कितना हुआ है। यह कदम बिल्डरों के लिए साफ संदेश है कि अब कागज़ी विकास नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत ही मानी जाएगी।
जीडीए के सहायक अभियंता पीयूष सिंह ने टीम के साथ मौके पर जाकर निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में कई बिल्डरों की लापरवाही सामने आई है। अब बैंक गारंटी जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई के आदेश दिए जा रहे हैं। प्राधिकरण के अधिकारी भी लगातार हर जोन से रिपोर्ट जुटा रहे हैं। हाल ही में प्राधिकरण की बैठक में उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने पाया कि कई बिल्डरों ने एलआईजी और ईडब्ल्यूएस भवनों के नाम पर वादे तो किए लेकिन धरातल पर कोई काम शुरू ही नहीं किया। कुछ प्रोजेक्ट्स में कार्य की गति इतनी धीमी है कि समयसीमा निकलने के बाद भी आवंटियों को कोई राहत नहीं मिल पाई। इस पर वत्स ने अधिकारियों को सख्त लहजे में आदेश दिया कि अब ढिलाई और मनमानी दोनों पर सर्जिकल स्ट्राइक करनी होगी। जीडीए का यह कदम आम नागरिकों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए बड़ी राहत है। लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि बिल्डर सिर्फ लक्जरी और हाई-एंड फ्लैट्स बना रहे हैं, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के लिए तय किए गए मकानों पर काम तक नहीं शुरू हो रहा। प्राधिकरण का कहना है कि अब आवंटियों की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ नहीं होगा।
उपाध्यक्ष अतुल वत्स का सख्त संदेश
जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कहा कि प्राधिकरण की मंजूर योजनाओं में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस भवनों का निर्माण अनिवार्य है। समयसीमा बीतने के बावजूद निर्माण न करने वाले बिल्डरों पर कठोर कार्रवाई होगी। उनकी बैंक गारंटी जब्त की जाएगी और प्रोजेक्ट्स की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ड्रोन सर्वे कराया जा रहा है। अब सिर्फ कागज़ों में दिखाए गए वादे नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत को ही माना जाएगा।
प्राधिकरण की सख्ती का असर – बिल्डरों में हड़कंप
जीडीए की इस कार्रवाई से बिल्डर लॉबी में हड़कंप मच गया है। अब तक जो बिल्डर नियमों को नजरअंदाज कर मनमानी करते रहे, वे भी अब निर्माण कार्य तेज़ करने की कोशिश में जुटेंगे। जीडीए कि सख्ती से प्राधिकरण की साख बढ़ेगी और सामान्य नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा।
















