गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में ‘परिवर्तन की बयार’

  • उपाध्यक्ष अतुल वत्स की सख्ती से बदल रहा कामकाज, अब शिकायतों का होगा त्वरित समाधान
  • आईजीआरएस पोर्टल पर लंबित नहीं रहेगी कोई शिकायत, जनता को मिलेगा भरोसेमंद और पारदर्शी तंत्र

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) लंबे समय तक आम जनता की शिकायतों और कामकाज की सुस्ती को लेकर आलोचनाओं का सामना करता रहा है। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कार्यशैली में आमूल-चूल बदलाव करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है शिकायत तभी निस्तारित मानी जाएगी, जब शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट होगा। यह नई नीति न केवल जीडीए की कार्य संस्कृति को नई दिशा दे रही है, बल्कि जनता के बीच प्राधिकरण की साख को भी मजबूत कर रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागों को निर्देश दिए थे कि आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण किया जाए। मुख्यमंत्री की इस प्राथमिकता को जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने आदेश जारी करते हुए कहा कि अब जीडीए में कोई भी शिकायत पेंडिंग में नहीं रहेगी। हर शिकायत का जिम्मेदारी से समाधान होगा और समाधान की जानकारी शिकायतकर्ता को सीधे फोन पर दी जाएगी।

अतुल वत्स ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी ने शिकायतों को नजरअंदाज किया या समयसीमा का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि जीडीए जनता की सेवा करने वाली संस्था है। यदि जनता को ही समाधान न मिले तो प्राधिकरण की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। इसलिए अब कोई भी शिकायत हल्के में नहीं ली जाएगी। जीडीए उपाध्यक्ष बनने के बाद से अतुल वत्स की कार्यशैली का सबसे बड़ा पहलू यह रहा है कि वे केवल आदेश नहीं देते बल्कि उनका क्रियान्वयन भी सुनिश्चित कराते हैं। वे नियमित रूप से विभागीय बैठकों में शिकायतों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंप रहे हैं।

जनता से सीधे संवाद की पहल को बढ़ावा दे रहे हैं। उनकी सख्ती और पारदर्शी दृष्टिकोण का ही परिणाम है कि जीडीए के कामकाज में तेजी आई है और जनता का भरोसा भी मजबूत हुआ है। यह बदलाव सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जीडीए की पूरी कार्य संस्कृति को बदलने वाला है। अतुल वत्स का फोकस है कि प्राधिकरण में हर काम पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से हो। उनकी कार्यशैली यह संदेश देती है कि अब जनता केंद्र में है और सभी फैसले जनता की सुविधा और संतुष्टि को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।

पहले की स्थिति और अब का बदलाव
कुछ समय पहले तक जीडीए पर यह आरोप लगता था कि यहाँ शिकायतें महीनों तक लंबित रहती हैं। शिकायतकर्ता को बार-बार दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। पहले शिकायतें केवल कागज़ पर निस्तारित दिखा दी जाती थीं, अब अधिकारी सीधे शिकायतकर्ता को फोन कर समाधान की पुष्टि करेंगे। इससे फर्जी निस्तारण की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और जनता का विश्वास प्राधिकरण में बढ़ेगा।

जनता को सीधी राहत
नई व्यवस्था के बाद जनता को बड़ी राहत मिलने वाली है। पहले लोग अपनी समस्या लेकर जीडीए दफ्तर में हफ्तों तक दौड़ते थे, लेकिन अब घर बैठे ही समाधान की जानकारी मिल जाएगी। जनता का मानना है कि इससे उनका समय, पैसा और ऊर्जा बचेगी। रामप्रसाद शर्मा, जो कि कविनगर के निवासी हैं, कहते हैं कि पहले हमें नक्शा पास कराने में महीनों लग जाते थे और शिकायत दर्ज करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती थी। लेकिन अब अगर अधिकारी खुद फोन करके समाधान बताएंगे तो भरोसा बहुत बढ़ेगा।

आईजीआरएस पोर्टल की अहमियत
आईजीआरएस पोर्टल उत्तर प्रदेश सरकार की वह प्रणाली है जिसके जरिए जनता अपनी शिकायत सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकती है।
हर महीने गाजियाबाद से सैकड़ों शिकायतें यहाँ दर्ज होती हैं, जिनमें अवैध निर्माण, भूखंड विवाद, आवंटन, नक्शा पास कराने, जल निकासी और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहते हैं। अतुल वत्स ने आदेश दिया है कि हर शिकायत को संबंधित एई (असिस्टेंट इंजीनियर) या प्रकारी अधिकारी देखेंगे। समाधान की सूचना शिकायतकर्ता को फोन कर दी जाएगी। जब तक शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होगा, शिकायत को निस्तारित नहीं माना जाएगा।

जनता के लिए बड़े फायदे
• बार-बार जीडीए दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।
• शिकायतकर्ता को समय पर समाधान मिलेगा।
• फाइलों में शिकायत दबाने की प्रवृत्ति खत्म होगी।
• अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय होगी।
• जीडीए की छवि जनता के बीच सुधरेगी।

अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष (वीसी)

जीडीए जनता की सेवा के लिए है। हमारी प्राथमिकता है कि हर शिकायत का त्वरित और संतोषजनक समाधान हो। जब तक शिकायतकर्ता स्वयं संतुष्ट नहीं होगा, शिकायत को निस्तारित नहीं माना जाएगा। अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिकायत का समाधान करने के साथ-साथ शिकायतकर्ता से सीधे संवाद करें और उसके समाधान की जानकारी दें। किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पारदर्शिता और जवाबदेही ही हमारी कार्य संस्कृति का आधार है।
अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष